इंदौर, 23 फरवरी 2026 — होली के पावन त्योहार को पर्यावरण-अनुकूल, स्वस्थ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल के तहत, जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट, सनावदिया (इंदौर) में “नेचुरल कलर्स फॉर सस्टेनेबल होली” प्रशिक्षण सप्ताह का दूसरा दिन आज आयोजित किया गया। पद्मश्री जनक पलटा मगिलिगन ने एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के रोटारैक्ट क्लब के छात्रों तथा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सोशल वर्क विभाग के छात्रों को प्राकृतिक रंग बनाने की सरल और व्यावहारिक विधि सिखाई।
जनक दीदी (जैसा कि उन्हें प्यार से पुकारा जाता है) ने अपने हाथों से फूलों और प्राकृतिक सामग्री से केमिकल-मुक्त सूखे तथा गीले रंग तैयार करके दिखाए। उन्होंने चुकंदर से लाल-गुलाबी, पलाश के फूलों से पीला-नारंगी, तथा गुलाब, पोई और बोगनविलिया से मैजेंटा-बैंगनी शेड्स बनाकर छात्रों को प्रदर्शित किया। उन्होंने बताया कि ये रंग न केवल त्वचा को सुंदर और स्वस्थ रखते हैं, बल्कि आसानी से धुल जाते हैं और पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल होते हैं।
होली और रंगपंचमी जैसे पवित्र त्योहार खुशी, उत्साह, प्रेम और आनंद का प्रतीक हैं, लेकिन आजकल केमिकल युक्त रंगों के कारण लोग चेहरे, आंखों, गले में जलन, एलर्जी, इंफेक्शन और कपड़ों पर दाग रह जाने के डर से होली खेलने से कतराते हैं। जनक दीदी का यह प्रयास लोगों को इस डर से मुक्ति दिलाने और त्योहार को सुरक्षित तरीके से मनाने का संदेश देता है।
एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट की फैकल्टी सदस्य विनीता झा ने सत्र की सराहना करते हुए कहा, “यह सेशन पूरी तरह प्रैक्टिकल था। छात्रों ने खुद रंग बनाए, मिलाए, छाने और ढेर सारे सवाल पूछे। हम जनक दीदी के इस ज्ञानवर्धक सेशन के लिए बहुत आभारी हैं। छात्रों ने फूलों-फलों से रंग बनाने की असली तकनीक सीखी और उनकी सादगीपूर्ण, सस्टेनेबल जीवनशैली से गहरी प्रेरणा ली।”
मास्टर ऑफ सोशल वर्क की छात्रा प्रियांशी मंडलोई ने कहा, “जनक जी का कार्य सोशल वर्क के छात्रों के लिए बेहद प्रेरणादायक है। यह दर्शाता है कि छोटे-छोटे सोच-समझकर किए गए प्रयास कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमें अधिक मूल्य-आधारित पेशेवर बनने के लिए प्रेरित करता है।”
प्रशिक्षण में छात्रों को घर या कॉलेज में आसानी से दोहराने योग्य तरीके मिले। उन्होंने प्राकृतिक रंगों की महत्वपूर्णता समझी और जनक दीदी की प्रकृति-प्रेम व सादगी से गहन प्रेरणा प्राप्त की। सत्र के अंत में सस्टेनेबल लिविंग और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा हुई, जहां छात्रों ने वादा किया कि वे स्वयं प्राकृतिक रंगों का उपयोग करेंगे, कॉलेज व समुदाय में जागरूकता फैलाएंगे तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने में योगदान देंगे।
यह प्रशिक्षण सप्ताह 22 से 27 फरवरी तक चल रहा है, जिसमें जनक पलटा मगिलिगन प्रतिदिन लोगों को मुफ्त में प्राकृतिक रंग बनाने की ट्रेनिंग दे रही हैं। उनका यह प्रयास इंदौर को अधिक हरित और जागरूक शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।






