राजस्थान विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान बंदरों के बढ़ते आतंक पर 22 मिनट तक विस्तृत चर्चा हुई, जो आमतौर पर 15 मिनट में समाप्त हो जाती है। इस दौरान हंगामा, टोका-टाकी और स्पीकर की फटकार भी देखने को मिली।
शाहपुरा विधायक मनीष यादव (कांग्रेस) ने अपने क्षेत्र शाहपुरा सहित पूरे प्रदेश में बंदरों की समस्या को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया। उन्होंने सदन को बताया कि 2025 में शाहपुरा क्षेत्र में लगभग 4200 लोगों को रेबीज के टीके लगाए गए, जिनमें 90 प्रतिशत मामले बंदरों के काटने से जुड़े थे। कई परिवार भय के कारण पलायन कर चुके हैं, फसलों को भारी नुकसान हो रहा है और कुछ मामलों में स्थायी शारीरिक क्षति भी हुई है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं।
चर्चा के दौरान सदन में पहले बीकानेर में बालिका हत्या मामले पर हंगामा चला। कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट की तैयारी में सदन से बाहर जाना शुरू कर दिया। ठीक उसी समय स्पीकर वासुदेव देवनानी ने मनीष यादव का नाम पुकारा। यादव ऊहापोह में पड़ गए, बाहर की ओर बढ़े लेकिन फिर लौट आए और अपनी बात पूरी की।
इस पर स्पीकर देवनानी काफी नाराज हुए। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा, “ऐसे मंत्री जवाब नहीं देंगे। आपका ही प्रस्ताव है और आप बाहर जा रहे हैं। मैंने नाम पुकारा और आप चले गए, ऐसे जवाब नहीं आता। आप दोनों काम एक साथ करना चाह रहे हैं। यह बर्दाश्त नहीं करूंगा।” स्पीकर ने उन्हें चेतावनी भी दी।
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा और वन मंत्री संजय शर्मा ने जवाब देते हुए समस्या की गंभीरता स्वीकार की। मंत्री खर्रा ने बताया कि जंगलों में मानवीय दखल बढ़ने और भोजन की कमी से बंदर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। उन्होंने विधायकों से सुझाव मांगे और आश्वासन दिया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर शीघ्र व्यापक योजना बनाकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।






