मुंबई: IDFC FIRST बैंक ने एक बड़ा खुलासा किया है कि बैंक की शुरुआती आंतरिक जांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में अनधिकृत और संभावित धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का पता चला है। यह मामला चंडीगढ़ ब्रांच से जुड़ा है, जहां कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के विभागों के खातों में अनियमित लेन-देन किए। बैंक ने SEBI के लिस्टिंग नियमों (रेगुलेशन 30) के तहत BSE और NSE को यह जानकारी दी, जिससे मामला अब निवेशकों और बाजार के सामने आ गया है।
घटना का विवरण:
- बैंक को 18 फरवरी 2026 से हरियाणा सरकार के विभागों से खातों में बैलेंस में अंतर की शिकायतें मिलीं।
- एक विभाग ने खाता बंद कर दूसरे बैंक में फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, तब ₹590 करोड़ (लगभग $65 मिलियन) का डिस्क्रेपेंसी सामने आया।
- प्रारंभिक जांच में पाया गया कि चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने अनधिकृत और फ्रॉडुलेंट तरीके से ट्रांजेक्शन किए, संभवतः बाहरी व्यक्तियों/एंटिटी के साथ मिलकर।
- यह मामला सिर्फ हरियाणा सरकार से जुड़े खातों तक सीमित है, ब्रांच के अन्य ग्राहकों पर असर नहीं पड़ा।
- बैंक ने तुरंत 4 संदिग्ध कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया, पुलिस में शिकायत दर्ज की, RBI को सूचित किया और KPMG को स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त किया।
प्रभाव और कार्रवाई:
- हरियाणा सरकार ने IDFC FIRST बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को डी-एम्पैनल कर दिया है – अब कोई सरकारी फंड इन बैंकों में नहीं रखा जाएगा।
- बैंक ने संदिग्ध लाभार्थी खातों पर लियन मार्क करने और रिकॉल नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
- अंतिम प्रभाव रिकवरी, क्लेम वैलिडेशन और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
- बैंक का कहना है कि यह “आइसोलेटेड इंसिडेंट” है और बैंक की बाकी ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं।
शेयर मार्केट पर असर:
- खुलासे के बाद IDFC FIRST बैंक के शेयर सोमवार (23 फरवरी 2026) को 20% तक गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गए – BSE पर 66.85 रुपये तक गिरा, मार्केट कैप में ₹14,000 करोड़ से ज्यादा की गिरावट।
- निवेशकों में चिंता है, लेकिन ब्रोकरेज फर्म्स (जैसे Ashika, Nomura) इसे “ऑपरेशनल रिस्क” बताते हुए फंडामेंटल्स पर ज्यादा असर नहीं मान रहे हैं।
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