देश का आम बजट 2026-27 अब बस एक सप्ताह दूर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में वित्त वर्ष 2027 (अप्रैल 2026-मार्च 2027) के लिए बजट पेश करेंगी। इस बार बजट पर बाजार की नजरें इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के साये में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन कर रही है।
सरकार द्वारा जारी पहले एडवांस अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में रियल जीडीपी ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 6.5% से काफी बेहतर है। स्थिर मुद्रास्फीति (लगभग 2% के आसपास) के साथ भारत मजबूत आधार पर 2026-27 में प्रवेश कर रहा है।
इक्वेंटिस वेल्थ एडवायजरी सर्विसेज के चीफ इंवेस्टमेंट ऑफिसर जसप्रीत सिंह अरोड़ा ने कहा, “7.4% की अनुमानित रियल जीडीपी ग्रोथ और नियंत्रित मुद्रास्फीति के साथ भारत मजबूत स्थिति में है। बजट में ऐसी घोषणाओं की उम्मीद है जो पहले से चल रही सफल नीतियों—जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्पशन को बढ़ावा—को और मजबूत करें।”
बजट से प्रमुख उम्मीदें
- कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) में 10-15% की बढ़ोतरी: इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर को सपोर्ट मिलने की संभावना।
- टैक्स राहत और स्लैब में बदलाव: मिडिल क्लास और होमबायर्स के लिए इनकम टैक्स में और राहत, खासकर नए vs पुराने टैक्स रिजीम में।
- मैन्युफैक्चरिंग, EV, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस: PLI स्कीम्स का विस्तार और सेक्टर-विशेष इंसेंटिव्स।
- फिस्कल प्रूडेंस के साथ ग्रोथ: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद फिस्कल डेफिसिट को नियंत्रित रखते हुए विकास को गति देना।
- कंजम्पशन बूस्ट: मिडिल इनकम ग्रुप के लिए affordability बढ़ाने वाले कदम, जैसे हाउसिंग और एजुकेशन से जुड़े प्रावधान।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला होगा, जिसमें प्रतिस्पर्धा, उत्पादकता और लॉन्ग-टर्म फिस्कल रेजिलिएंस पर फोकस रहेगा। अमेरिकी टैरिफ जैसे बाहरी दबावों के बीच भारत अपनी आर्थिक स्वायत्तता और ग्रोथ मोमेंटम को बनाए रखने की कोशिश करेगा।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर बजट में कैपेक्स और कंजम्पशन दोनों को बैलेंस किया गया तो शेयर बाजार में पॉजिटिव रिएक्शन देखने को मिल सकता है।






