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February 19, 2026 3:15 pm

राजस्थली एम्पोरियम की ‘क्राफ्ट कला के’ प्रदर्शनी आयोजित , अंतरराष्ट्रीय अतिथियों को कराया राजस्थान की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा से रूबरू

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जयपुर। भारतीय संसद में आयोजित 28वीं Conference of Speakers and Presiding Officers of the Commonwealth (CSPOC-2026) में 60 से अधिक देशों के स्पीकर्स, IPU एवं CPA के प्रेसिडेंट्स की ऐतिहासिक सहभागिता ने भारत की लोकतांत्रिक शक्ति को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली स्वर प्रदान किया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पश्चात जयपुर को 60 से अधिक देशों से पधारे विशिष्ट अतिथियों की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर राजस्थान की भव्य संस्कृति, स्वाभिमान और अतिथि-सत्कार को प्रदर्शित करने हेतु कांस्टीट्यूशनल क्लब ऑफ राजस्थान में भव्य स्वागत, सांस्कृतिक एवं सहभोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसी गरिमामयी आयोजन के अंतर्गत Rajasthali Emporium द्वारा ‘क्राफ्ट कला के’ नामक विशेष हस्तशिल्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान की पारंपरिक कला, सूक्ष्म कारीगरी और शिल्प कौशल की समृद्ध झलक प्रस्तुत की गई।

प्रदर्शनी की विशेषता यह रही कि इसमें राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पगुरुओं को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अपने जीवंत शिल्प प्रदर्शन एवं संवाद के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को भारतीय हस्तकला की तकनीक, परंपरा और सांस्कृतिक दर्शन से अवगत कराया।

इस अवसर पर माया ठाकुर, निदेशक Rajasthali Emporium ने सभी अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय अतिथियों को ‘क्राफ्ट कला के’ प्रदर्शनी का स्वयं भ्रमण कराया तथा उन्हें विभिन्न शिल्पगुरुओं से परिचित कराया। उनके मार्गदर्शन में अतिथियों ने राजस्थान की विविध शिल्प विधाओं को निकट से देखा और समझा, जिससे भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरी सराहना उत्पन्न हुई।

कार्यक्रम की गरिमा राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की उपस्थिति से और अधिक बढ़ी। उनकी गरिमामयी सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने ‘क्राफ्ट कला के’ प्रदर्शनी में प्रस्तुत शिल्पगुरुओं के लाइव डेमो की विशेष सराहना की तथा राजस्थान की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के प्रयासों की प्रशंसा की। उनकी सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक एवं स्मरणीय महत्व प्रदान किया।

यह आयोजन भारत के लोकतंत्र की सशक्त छवि के साथ-साथ राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक पहचान और हस्तशिल्प परंपरा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं स्मरणीय पहल सिद्ध हुआ।

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