Explore

Search

January 17, 2026 8:32 am

भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर मंडराया खतरा! ट्रंप के टैरिफ से देश की दवा कंपनियों को बड़ा झटका……

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नए टैरिफ समझौतों ने वैश्विक फार्मा बाजार में चिंता की लहर फैला दी है. जापान के बाद अब ट्रंप ने यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ भी व्यापार समझौता किया है, जिसके तहत EU से आयातित फार्मास्युटिकल उत्पादों पर 15% शुल्क लगाया जाएगा. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह टैरिफ नीति भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए भी खतरे की घंटी बन सकती है, खासकर तब जब अमेरिका भारत की दवाओं का सबसे बड़ा बाजार है.

उच्च रक्तचाप: कारण, लक्षण, उपचार और बचाव

जनरिक दवाओं की कीमतों में भारी गिरावट

भारत की प्रमुख दवा कंपनियों सिप्ला (Cipla) और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr. Reddys) ने जून 2025 की तिमाही में अमेरिका से होने वाली बिक्री में सुस्ती दर्ज की है. इसकी बड़ी वजह एक प्रमुख कैंसर रोधी जनरिक दवा रेवलिमिड की कीमतों में गिरावट रही. कंपनियों को उम्मीद है कि नई दवाओं के लॉन्च और मौजूदा उत्पादों के विस्तार से इस असर को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा लेकिन टैरिफ का खतरा अब और बड़ा होता जा रहा है.

भारत के लिए ज्यादा खतरनाक है टैरिफ स्ट्रक्चर

यूरोप की कंपनियां महंगी इनोवेटिव दवाएं निर्यात करती हैं, इसलिए वे 15% टैरिफ का भार कुछ हद तक सह सकती हैं. लेकिन भारत की कंपनियां सस्ती जनरिक दवाएं बनाती हैं, जिनका मुनाफा पहले ही सीमित होता है. यदि इन पर भी टैरिफ लगाया गया, तो लागत बढ़ेगी और अमेरिका में उनकी प्रतिस्पर्धा घटेगी. अभी अमेरिका भारत से औषधियों का सबसे बड़ा आयातक है. यदि भारत की दवाओं पर भी टैरिफ लागू हुए, तो पूरा एक्सपोर्ट मॉडल डगमगा सकता है.

कई देशों से हो चुका है अमेरिका का समझौता

अमेरिका ने जापान और EU के बाद अब ब्रिटेन के साथ भी समझौता किया है, जिसमें 10% टैरिफ की बात तय हुई है. ट्रंप प्रशासन यह समझौते पारस्परिक शुल्क (reciprocal tariff) के नाम पर कर रहा है, जिसकी डेडलाइन 1 अगस्त तय की गई है. ऐसे में pharma सेक्टर के लिए आने वाले हफ्ते बेहद अहम साबित हो सकते हैं. हालांकि इन टैरिफ्स को लागू करने की तारीख अभी लचीली है और सेमीकंडक्टर व फार्मा आयातों पर जांच भी जारी है, लेकिन यूरोप से दवाओं पर शुल्क तय है. इससे संकेत मिलता है कि भारत भी इस सूची में जल्द शामिल हो सकता है.

निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत

अब तक अमेरिकी बाजार को सबसे मजबूत और खुला मानने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों को ट्रंप की नीतियों से बड़ा झटका लग सकता है. यदि जनरिक दवाओं पर शुल्क लगा, तो इससे भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ेगी, मुनाफा घटेगा और शेयर बाजार में इनका प्रदर्शन कमजोर हो सकता है. Financial Timesकी रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप के कार्यकाल में विदेशी सामानों पर अमेरिकी टैरिफ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. अमेरिका में आयातित दवाओं पर टैरिफ से फार्मा इंडस्ट्री को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है.

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर