Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 5 नवंबर को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद बाजार में उत्साह बढ़ा। सेंसेक्स 2100 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने भी 600 अंकों की छलांग लगाई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को बड़ी राहत मिली और दलाल स्ट्रीट पर खरीदारी का माहौल बन गया।
सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी
शेयर बाजार में कारोबार शुरू होते ही तेजी का माहौल देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में जोरदार खरीदारी हुई। सेंसेक्स 2100 अंकों से ज्यादा चढ़ा, वहीं निफ्टी में भी 600 अंकों तक की तेजी दर्ज की गई।
इस तेजी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। बाजार के कई प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और निवेशकों की संपत्ति में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।
ट्रंप की हार से बाजार में उत्साह
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने वैश्विक बाजारों का ध्यान खींचा है। डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में बड़ा झटका लगा, जिसके बाद निवेशकों ने राहत की सांस ली।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी राजनीति में आए इस बदलाव से व्यापार और वैश्विक आर्थिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता कम होने की उम्मीद बढ़ी है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिली राहत
भारतीय शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी रही। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में कमी से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मिले। इससे बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत हुआ।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को समर्थन
शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने भी तेजी को समर्थन दिया। विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयरों में निवेश बढ़ने से बाजार का माहौल मजबूत हुआ।
इसके अलावा वैश्विक बाजारों में तेजी और कंपनियों के बेहतर नतीजों की उम्मीद ने भी निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शेयर बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
निवेशकों को बाजार की तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।








