मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के कई शक्तिशाली देश अब खुलकर सामने आ गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट में लगातार हो रहे हमलों और जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद छह देशों ने मिलकर समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने का बड़ा फैसला लिया है। इस संयुक्त कदम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाना है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों पर हुए हमलों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी थी। कई देशों ने इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित समूहों का हाथ होने का आरोप लगाया है। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जापान ने मिलकर एक संयुक्त सुरक्षा मिशन शुरू करने पर सहमति बनाई है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस रास्ते में किसी भी तरह की असुरक्षा से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसी कारण इन देशों ने संयुक्त नौसैनिक गश्त, निगरानी ड्रोन और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली तैनात करने का निर्णय लिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। संयुक्त मिशन के तहत जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिनमें लगातार निगरानी रखी जाएगी।
इस बीच, मध्य-पूर्व के कई देशों ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा है कि इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी। हालांकि कुछ देशों ने चिंता भी जताई है कि इससे तनाव और बढ़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत के रास्ते खुले नहीं रखे गए तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
विश्व बाजार में भी इस खबर का असर देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमतों में हलचल देखी गई और कई देशों ने अपने जहाजों को अतिरिक्त सुरक्षा के साथ भेजने का फैसला किया है।
फिलहाल सभी की नजर इस संयुक्त मिशन पर है। अगर यह योजना सफल होती है तो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को बड़ी राहत मिलेगी और वैश्विक व्यापार में स्थिरता लौट सकती है।






