दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और स्वेज नहर—अक्सर खबरों में रहते हैं। लेकिन एक बड़ा सवाल हमेशा उठता है:
जहां होर्मुज से जहाज मुफ्त गुजरते हैं, वहीं स्वेज नहर से गुजरने के लिए भारी ट्रांजिट फीस क्यों देनी पड़ती है?
इसका जवाब अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून में छिपा है।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक प्राकृतिक जलडमरूमध्य (Natural Strait) है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग का हिस्सा है। यह खाड़ी देशों को खुले समुद्र से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार:
- ऐसे स्ट्रेट्स में सभी देशों को “ट्रांजिट पासेज” (Transit Passage) का अधिकार होता है
- कोई भी देश यहां से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या टैक्स नहीं लगा सकता
- केवल सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े नियम लागू किए जा सकते हैं
यानी, होर्मुज से गुजरना अंतरराष्ट्रीय अधिकार है—इसलिए यह फ्री है।
स्वेज नहर में फीस क्यों ली जाती है?
दूसरी ओर, स्वेज नहर एक मानव निर्मित (Man-Made Canal) है, जिसे मिस्र ने बनाया और संचालित करता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक:
- कोई भी देश अपनी बनाई नहर पर फीस वसूलने का अधिकार रखता है
- यह फीस नहर के रखरखाव, सुरक्षा और संचालन के लिए ली जाती है
- स्वेज नहर से गुजरना जरूरी नहीं, जहाज चाहें तो अफ्रीका के चारों ओर से लंबा रास्ता ले सकते हैं
इसलिए स्वेज नहर की ट्रांजिट फीस पूरी तरह कानूनी और वैध मानी जाती है।
दोनों के बीच बड़ा फर्क
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज → प्राकृतिक रास्ता, अंतरराष्ट्रीय अधिकार, कोई टोल नहीं
- स्वेज नहर → मानव निर्मित, एक देश का नियंत्रण, फीस लागू
वैश्विक असर
इन दोनों रास्तों का वैश्विक व्यापार में बड़ा योगदान है:
- होर्मुज से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है
- स्वेज नहर यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री मार्ग है
अगर इनमें से किसी एक में भी रुकावट आती है, तो पूरी दुनिया में तेल और सामान की कीमतों पर असर पड़ता है।
निष्कर्ष
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और स्वेज नहर के नियमों में फर्क उनके प्राकृतिक और कृत्रिम होने की वजह से है।
जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून सभी को फ्री रास्ता देता है, वहीं दूसरी तरफ किसी देश द्वारा बनाई गई नहर पर शुल्क लेना पूरी तरह वैध है।







