गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। इन बदलावों का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, प्रेग्नेंसी में पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) में पथरी बनने का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक हो सकता है। गायनेकोलॉजिस्ट का कहना है कि इस दौरान हार्मोनल बदलाव, वजन बढ़ना और खानपान में परिवर्तन इसकी मुख्य वजह बनते हैं। ऐसे में कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करना मां और बच्चे दोनों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
क्यों बढ़ता है गॉल ब्लैडर स्टोन का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार प्रेग्नेंसी में शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है।
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एस्ट्रोजन की अधिक मात्रा से पित्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है
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प्रोजेस्टेरोन पित्ताशय की गति को धीमा कर देता है
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इससे पित्त पूरी तरह खाली नहीं हो पाता
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धीरे-धीरे पित्त गाढ़ा होकर पथरी का रूप ले सकता है
इसके अलावा गर्भावस्था में वजन बढ़ना, कम शारीरिक गतिविधि और ज्यादा तला-भुना खाना भी जोखिम को बढ़ाते हैं।
इन संकेतों को न करें इग्नोर
डॉक्टरों के अनुसार अगर गर्भवती महिला को ये लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए —
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दाईं तरफ ऊपरी पेट में तेज दर्द
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खाना खाने के बाद भारीपन
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मतली या उल्टी बार-बार होना
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पेट फूलना और गैस
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पीठ या कंधे में दर्द
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अपच की समस्या
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बुखार के साथ पेट दर्द
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आंखों या त्वचा का पीला पड़ना
ये लक्षण पित्ताशय की पथरी या सूजन का संकेत हो सकते हैं।
प्रेग्नेंसी में क्यों जरूरी है सावधानी
गायनेकोलॉजिस्ट बताते हैं कि गर्भावस्था में गॉल ब्लैडर स्टोन होने पर
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तेज दर्द के दौरे पड़ सकते हैं
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संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है
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गंभीर स्थिति में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है
हालांकि ज्यादातर मामलों में डॉक्टर दवा और खानपान से ही स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, क्योंकि प्रेग्नेंसी में ऑपरेशन से बचा जाता है जब तक बहुत जरूरी न हो।
बचाव के तरीके क्या हैं
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ सावधानियां अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है —
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ज्यादा तला-भुना और फैटी खाना कम खाएं
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हल्का और संतुलित आहार लें
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रोज थोड़ा-बहुत चलना या हल्की एक्सरसाइज करें (डॉक्टर की सलाह से)
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एक साथ ज्यादा खाना खाने से बचें
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पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं
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वजन को अचानक बढ़ने न दें
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डॉक्टर की नियमित जांच कराते रहें
डॉक्टर की सलाह
गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार,
“प्रेग्नेंसी में पेट दर्द को सामान्य गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर दर्द बार-बार हो रहा है तो अल्ट्रासाउंड जांच कराना जरूरी है, ताकि समय रहते पित्ताशय की पथरी का पता चल सके।”
निष्कर्ष
गर्भावस्था एक संवेदनशील समय होता है, इसलिए छोटी-सी परेशानी भी गंभीर हो सकती है। सही खानपान, नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह से गॉल ब्लैडर स्टोन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अगर कोई असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।






