ई दिल्ली: भारत-रूस तेल का खेल अब एक नए दौर में पहुंच गया है! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को अपनी ‘वॉचलिस्ट’ पर डाल दिया है। ट्रंप के दावे और हालिया US-India ट्रेड डील के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 तक भारत रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद कर देगा? क्या यह ट्रंप का दबाव है या भारत की अपनी रणनीति? आइए समझते हैं पूरी कहानी
ट्रंप का दावा और ट्रेड डील की हकीकत
- फरवरी 2026 में ट्रंप-मोदी के बीच हुई ट्रेड डील में ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और इसके बदले अमेरिका (और शायद वेनेजुएला) से ज्यादा तेल खरीदेगा।
- ट्रंप ने भारत पर लगे 25% पेनल्टी टैरिफ (रूसी तेल खरीद के कारण) को हटा दिया, कुल टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया। साथ ही पुराने पेनल्टी का रिफंड भी मिल सकता है (लगभग ₹40,000 करोड़ की राहत)।
- लेकिन एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में साफ शर्त: अगर भारत ने रूस से तेल खरीद दोबारा शुरू की, तो 25% पेनल्टी वापस लग सकती है। अमेरिका ने इसकी निगरानी के लिए टास्क फोर्स बनाई है।
रूसी तेल आयात में क्या बदलाव आया?
- 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस का सबसे बड़ा खरीदार बना। 2024-25 में भारत ने रूस से 87 मिलियन टन से ज्यादा क्रूड ऑयल खरीदा (करीब 1.5-2 मिलियन बैरल प्रतिदिन)।
- लेकिन ट्रंप के दबाव और सैंक्शंस के बाद आयात घटा: जनवरी 2026 में 1.2 मिलियन बैरल/दिन, फरवरी-मार्च में और कम होने की संभावना (800,000-1 मिलियन बैरल/दिन)।
- भारतीय रिफाइनर्स (IOCL, BPCL, Reliance) ने मार्च-अप्रैल के लिए रूसी तेल के ऑफर ठुकरा दिए हैं।
भारत का स्टैंड क्या है?
- विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा: ऊर्जा सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तेल खरीद का फैसला राष्ट्रीय हित के आधार पर होगा।
- भारत ने ट्रंप के “पूर्ण बंद” वाले दावे की पुष्टि नहीं की, न ही खारिज किया। MEA ने दोहराया कि भारत मल्टी-सोर्स से तेल खरीदता रहेगा।
- रूस ने भी कहा: भारत किसी से भी तेल खरीद सकता है, हमारी साझेदारी मजबूत है।
2027 तक क्या होगा? संभावनाएं
- पूर्ण बंद मुश्किल: भारत की 90% तेल जरूरत आयात पर निर्भर है। रूस से सस्ता तेल (डिस्काउंट पर) मिलना बंद हुआ तो महंगा पड़ेगा। अमेरिका/वेनेजुएला से इतनी मात्रा ($500 बिलियन डील के बावजूद) रिप्लेस करना आसान नहीं।
- आंशिक कमी: आयात 50% तक घट सकता है। भारत अपनी डायवर्सिफिकेशन रणनीति चला रहा है – मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, अमेरिका से ज्यादा खरीद।
- ट्रंप का गेम: ट्रंप यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए रूस की ऑयल रेवेन्यू काटना चाहते हैं। भारत पर दबाव डालकर वे चीन (दूसरा बड़ा खरीदार) पर भी फोकस कर सकते हैं।
- भारत की स्मार्ट प्ले: भारत ने ट्रेड डील से टैरिफ राहत ली, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा पर समझौता नहीं किया। 2027 तक पूर्ण कटऑफ की बजाय बैलेंस्ड अप्रोच संभावित।
यह तेल का खेल अब सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि भू-राजनीति का बड़ा हिस्सा बन गया है। ट्रंप की ‘वॉचलिस्ट’ में भारत है, लेकिन भारत अपनी ऊर्जा स्वतंत्रता और रणनीतिक स्वायत्तता पर कायम है। क्या 2027 तक रूसी तेल का ‘गेम’ खत्म होगा? समय बताएगा!
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