इसराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने एक इंटरव्यू में ऐसा बयान दे दिया कि पूरा मध्य पूर्व हिल गया! ट्रंप प्रशासन के इस राजदूत ने टकर कार्लसन के पॉडकास्ट में कहा कि अगर इसराइल नाइल नदी से लेकर यूफ्रेट्स नदी तक (यानी मध्य पूर्व के बड़े हिस्से—लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, सऊदी अरब के कुछ हिस्से आदि) पर कब्जा कर ले तो भी “यह ठीक होगा” (It would be fine if they took it all)।
हकाबी ने बाइबल का हवाला देते हुए कहा कि यहूदी लोगों को इस भूमि पर ईश्वरीय अधिकार है। उन्होंने कहा, “यहूदियों का इस भूमि पर अधिकार है… अगर वे सब ले लें तो भी कोई दिक्कत नहीं।” हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि यह “हाइपरबोलिक” (अतिशयोक्तिपूर्ण) बयान था और इसराइल फिलहाल ऐसा विस्तार नहीं चाहता, बल्कि सिर्फ अपनी सुरक्षा चाहता है।
इस्लामी और अरब देशों का तीखा विरोध
इस बयान पर 14 से ज्यादा अरब और इस्लामी देशों ने एक साथ कड़ी निंदा की। यूएई की विदेश मंत्रालय की ओर से जारी संयुक्त बयान में शामिल देशों में शामिल हैं:
- सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन, लेबनान, सीरिया, फिलिस्तीन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की आदि।
- साथ ही तीन बड़े संगठन: ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC), अरब लीग, और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC)।
उन्होंने बयान को “खतरनाक, भड़काऊ, अतिवादी, और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताया। कहा गया कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर और राज्यों की संप्रभुता का अपमान है, और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालता है। सऊदी अरब ने इसे “अस्वीकार्य” और “उग्रवादी बयानबाजी” कहा, जबकि मिस्र ने इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन” करार दिया।
क्या असर पड़ेगा?
यह बयान ट्रंप के प्रो-इसराइल स्टैंड को और मजबूत दिखाता है, लेकिन मध्य पूर्व में पहले से तनाव (गाजा, वेस्ट बैंक आदि) के बीच यह आग में घी डालने जैसा है। कई देशों ने अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट से स्पष्टीकरण मांगा है। हकाबी पहले से ही क्रिश्चियन जियोनिस्ट और इसराइल के कट्टर समर्थक माने जाते हैं, लेकिन यह बयान अब तक के सबसे विवादास्पद में से एक है।






