ईरान में पिछले तीन दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन सरकार की कड़ी कार्रवाई के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शनिवार (10 जनवरी 2026) को देशभर में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जहां प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए और इस्लामिक गणराज्य के खात्मे की मांग की।
प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक संकट से शुरू हुए थे, जिसमें ईरानी रियाल का तेजी से मूल्यह्रास, महंगाई और बिजली-गैस की कमी प्रमुख कारण हैं। लेकिन अब ये विरोध शासन-विरोधी आंदोलन में बदल चुके हैं, जहां लोग पहलवी राजशाही की बहाली और आजादी की मांग कर रहे हैं।
इंटरनेट शटडाउन और सूचना का अभाव
ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों को रोकने के लिए 8 जनवरी 2026 से देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह शटडाउन 2022 के महिला-जीवन-आजादी आंदोलन या 2019 के विरोध से भी ज्यादा गंभीर है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय मीडिया, जिसमें बीबीसी शामिल है, ईरान के अंदर से सीधे रिपोर्टिंग नहीं कर पा रहे। जानकारी मुख्य रूप से बाहर से वेरिफाई वीडियो, प्रत्यक्षदर्शी बयान और मानवाधिकार संगठनों (जैसे HRANA, Iran Human Rights) पर निर्भर है।
हिंसा और हताहत
सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर लाइव फायरिंग और भारी दमन का सहारा लिया है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार:
- पिछले 48 घंटों में 2,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए (Iran International के अनुसार)।
- कुल मिलाकर 500 से अधिक मौतें और हजारों गिरफ्तारियां (HRANA और अन्य स्रोत)।
- तेहरान, शिराज, मशहद, करज जैसे शहरों में अस्पताल घायलों से भरे हुए हैं, कई में गोली लगने के घाव हैं।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि तेहरान की सड़कों पर “सैकड़ों शव” बिखरे हुए थे। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट ब्लैकआउट के पीछे “बड़े पैमाने पर नरसंहार” की आशंका है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर हिंसा बढ़ाता है, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है।
- यूके, जर्मनी और फ्रांस ने संयुक्त बयान में हिंसा की निंदा की।
- ईरान ने अमेरिका को दोष देते हुए कहा है कि प्रदर्शन “विदेशी साजिश” हैं।






