कोलकाता। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राज्य में आयोजित एक कार्यक्रम में कम उपस्थिति और कथित कमियों को लेकर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को घेरा है। उन्होंने राष्ट्रपति पद की गरिमा को बनाए रखने की बात कही और राज्य सरकार की व्यवस्थाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
यह विवाद शनिवार को राष्ट्रपति मुर्मू के बागडोगरा हवाई अड्डे के पास आयोजित आदिवासी सामुदायिक कार्यक्रम से शुरू हुआ। राष्ट्रपति ने यहां कम उपस्थिति पर निराशा जताई और कार्यक्रम स्थल को अचानक बदलने के फैसले पर सवाल उठाए। मूल रूप से यह कार्यक्रम फांसिदेवा में होना था, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इसे बिधाननगर माझी थान के पास ‘उत्तराण टाउनशिप’ में शिफ्ट कर दिया गया। राष्ट्रपति ने अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने अस्वीकार्य बताया
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णनने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “माननीय राष्ट्रपति का पद हमारे गणतंत्र का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और इसे हमेशा वह गरिमा, प्रोटोकॉल और सम्मान मिलना चाहिए जिसका यह हकदार है। पश्चिम बंगाल में आज हुई व्यवस्थाओं में संवैधानिक पद के अनुरूप कमियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। राष्ट्रपति पद की पवित्रता को हमेशा बनाए रखा जाना चाहिए और देश के सर्वोच्च पद को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।”
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान उनका अपमान ‘शर्मनाक और अभूतपूर्व’ है। पीएम ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने सभी हदें पार कर दीं और राज्य में संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा कि यह घटना लोकतंत्र के लिए खतरा है और केंद्र सरकार इस पर सख्त रुख अपनाएगी।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि कार्यक्रम की व्यवस्था में कोई कमी नहीं थी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक ही बदलाव किए गए। उन्होंने विपक्ष पर राष्ट्रपति के दौरे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। टीएमसी प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति का पूरा सम्मान किया और कम उपस्थिति का कारण मौसम या अन्य स्थानीय मुद्दे हो सकते हैं, न कि सरकारी लापरवाही।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद भाजपा और टीएमसी के बीच की लड़ाई को और तीखा बना सकता है। राष्ट्रपति मुर्मू का दौरा आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित था, लेकिन अब यह राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।






