नई दिल्ली: एक अनोखे और चर्चा में आए मामले ने प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। गोलीकांड में घायल हो चुके अधिकारी Rinku Rahi ने अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से हटकर राज्य सिविल सेवा यानी PCS में वापस जाने की इच्छा जताई है। उनके इस फैसले ने न केवल सरकारी नियमों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी नई चर्चा शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि Rinku Rahi पहले राज्य सिविल सेवा (PCS) के अधिकारी थे, जिन्हें बाद में पदोन्नति के जरिए IAS में शामिल किया गया था। लेकिन अब उन्होंने व्यक्तिगत और पेशेवर कारणों का हवाला देते हुए फिर से PCS में लौटने की इच्छा जताई है। यह मांग इसलिए भी असामान्य मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर अधिकारी पदोन्नति के बाद ऊंचे पद पर बने रहना चाहते हैं।
सरकारी नियमों की बात करें तो IAS में शामिल होने के बाद वापस राज्य सेवा में लौटने का कोई स्पष्ट और सामान्य प्रावधान नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार जब कोई अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बन जाता है, तो उसका कैडर और सेवा शर्तें केंद्र सरकार के अधीन आ जाती हैं। ऐसे में सीधे PCS में वापसी करना आसान नहीं होता।
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) या अन्य प्रशासनिक विकल्पों के जरिए अधिकारी अपने करियर में बदलाव कर सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया जटिल और नियमों से बंधी होती है। इस मामले में भी अंतिम निर्णय केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर ही लिया जाएगा।
Rinku Rahi का यह कदम उनके साथ हुई पूर्व घटना के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जब उन्हें ड्यूटी के दौरान गोली का सामना करना पड़ा था। माना जा रहा है कि उस घटना के बाद उनकी प्राथमिकताएं और दृष्टिकोण बदल गए हैं, जिसके चलते उन्होंने यह फैसला लिया है।
इस मामले ने प्रशासनिक सेवा में काम करने वाले अधिकारियों के बीच भी चर्चा छेड़ दी है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत निर्णय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सेवा ढांचे और नियमों के पुनर्मूल्यांकन की जरूरत से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल, इस मुद्दे पर अंतिम फैसला आना बाकी है, लेकिन इतना तय है कि Rinku Rahi का यह कदम आने वाले समय में प्रशासनिक नियमों और करियर विकल्पों पर नई बहस को जन्म दे सकता है।







