गुजरात पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड और मानव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने सूरत के दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जो बेरोजगार युवाओं को विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया और म्यांमार के साइबर ठगी केंद्रों में भेजते थे। वहां उन्हें जबरन “साइबर गुलाम” बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी के काम करवाए जाते थे।
गिरफ्तार आरोपी:
- ध्रुव डोबरिया (कमरेज, सूरत)
- कौशिक पेथानी (मोटा वराछा, सूरत)
दोनों की उम्र लगभग 35 वर्ष है। पुलिस को खुफिया सूचना मिलने पर बुधवार को इनकी गिरफ्तारी की गई। जांच में पता चला कि ये आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए बेरोजगार युवाओं को संपर्क करते थे। उन्हें कंबोडिया, म्यांमार या लाओस में आईटी कंपनी या डेटा एंट्री जॉब का लालच देते थे, जहां अच्छा वेतन और आसान काम का वादा किया जाता था।
ठगी का तरीका:
युवाओं को पहले थाईलैंड, दुबई या अन्य देशों के रास्ते ले जाया जाता था। वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट, फोन और दस्तावेज छीन लिए जाते थे। फिर उन्हें म्यांमार या कंबोडिया के साइबर फ्रॉड कैंपों में पहुंचा दिया जाता था। वहां चीनी माफिया द्वारा संचालित इन कैंपों में उन्हें फिशिंग, क्रिप्टोकरेंसी स्कैम, पोंजी स्कीम, डेटिंग ऐप फ्रॉड जैसी ऑनलाइन ठगियों में जबरन लगाया जाता था। मना करने पर शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाती थीं। इसे “साइबर गुलामी” या “डिजिटल गुलामी” कहा जा रहा है।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से दो हाई-एंड स्मार्टफोन (iPhone 17 Pro मॉडल सहित) जब्त किए हैं। जांच जारी है, जिसमें नेटवर्क के अन्य सदस्यों और फंसे हुए पीड़ितों की तलाश की जा रही है।
यह मामला दक्षिण-पूर्व एशिया में चल रहे बड़े साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़ा है, जहां हजारों भारतीय युवा फंस चुके हैं। गुजरात पुलिस ने पहले भी ऐसे कई मामलों में सरगनाओं को पकड़ा है, लेकिन यह गिरफ्तारी नेटवर्क के ग्राउंड लेवल एजेंटों पर नकेल कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
युवाओं को सलाह: विदेश में नौकरी के नाम पर सोशल मीडिया पर आने वाले ऑफर की जांच जरूर करें, एजेंटों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।






