अमेरिका की सुरक्षा नीति पर भरोसा करना साउथ कोरिया के लिए अब भारी पड़ता दिख रहा है। वर्षों पहले उत्तर कोरिया के मिसाइल खतरे से बचने के लिए साउथ कोरिया ने अमेरिका के कहने पर THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किया था। उस समय इस फैसले ने चीन को नाराज़ कर दिया था और दोनों देशों के रिश्तों में गंभीर तनाव आ गया था। अब हालात ऐसे बन रहे हैं कि साउथ कोरिया को न तो चीन का भरोसा मिल रहा है और न ही अमेरिका का पूरा साथ।
THAAD की तैनाती 2016–2017 के दौरान हुई थी, जब उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर रहा था। अमेरिका ने साउथ कोरिया को भरोसा दिलाया था कि यह सिस्टम उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है। सियोल ने वॉशिंगटन की बात मान ली, लेकिन चीन ने इसका कड़ा विरोध किया। चीन का कहना था कि THAAD का रडार उसकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
चीन की नाराज़गी का असर सीधे साउथ कोरिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा। चीनी टूरिस्ट कम हो गए, साउथ कोरियाई कंपनियों पर दबाव बढ़ा और कई व्यापारिक समझौते प्रभावित हुए। उस समय साउथ कोरिया ने यह नुकसान इसलिए सहा क्योंकि उसे अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर भरोसा था।
लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है। हाल ही में खबर आई कि अमेरिका अपने सैन्य संसाधनों को मध्य-पूर्व की ओर शिफ्ट करने की योजना बना रहा है, जिसके कारण THAAD सिस्टम की तैनाती को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है। इस कदम ने साउथ कोरिया में चिंता बढ़ा दी है कि कहीं अमेरिका अपनी प्राथमिकताएं बदलकर एशिया में अपनी मौजूदगी कम न कर दे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका का ध्यान ईरान और मध्य-पूर्व की तरफ ज्यादा गया, तो कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति कमजोर हो सकती है। ऐसे में साउथ कोरिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसने चीन से रिश्ते खराब कर लिए, लेकिन अब अमेरिका भी पूरी तरह उसके साथ खड़ा दिख नहीं रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि THAAD विवाद ने साउथ कोरिया को यह सबक दिया है कि बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित रास्ता होता है। केवल एक देश पर भरोसा करना लंबे समय में जोखिम भरा साबित हो सकता है।
फिलहाल सियोल की सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन यह साफ है कि THAAD को लेकर शुरू हुआ विवाद आज भी साउथ कोरिया की विदेश नीति पर भारी पड़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि साउथ कोरिया अमेरिका के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारी को कैसे संतुलित करता है और चीन के साथ बिगड़े रिश्तों को सुधारने की कोशिश करता है या नहीं।






