राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए घोषणा की है कि नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ दावोस (स्विट्जरलैंड) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान हुई “बहुत ही उत्पादक” बैठक के बाद ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े एक भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क (ढांचा) तैयार हो गया है।
इसके परिणामस्वरूप, उन्होंने उन यूरोपीय देशों (जिनमें डेनमार्क सहित कई नाटो सदस्य शामिल हैं) पर टैरिफ लगाने की धमकी को फिलहाल वापस ले लिया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होने वाली थी। ट्रंप ने कहा कि यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो यह अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।
मुख्य बिंदु:
- ट्रंप का दावा: बैठक के बाद ग्रीनलैंड और आर्कटिक पर “फ्यूचर डील का फ्रेमवर्क” तैयार हुआ है। उन्होंने सैन्य बल के इस्तेमाल से इनकार किया है और बातचीत पर जोर दिया है।
- नाटो की प्रतिक्रिया: नाटो ने बैठक को “बेहद सार्थक” बताया है। महासचिव रुट्टे ने कहा कि डेनमार्क की संप्रभुता पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि चर्चाएं आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा पर केंद्रित हैं। इसमें रूस और चीन की महत्वाकांक्षाओं को रोकना, अमेरिकी सैन्य बेस की संभावना, महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच, और मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे “गोल्डन डोम”) शामिल हो सकते हैं।
- पृष्ठभूमि: ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड को “खरीदने” या नियंत्रण में लेने की इच्छा जताई थी, लेकिन अब फोकस सुरक्षा, खनिज संसाधन और आर्कटिक में रणनीतिक लाभ पर है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने बार-बार कहा है कि द्वीप बिक्री के लिए नहीं है।
- प्रभाव: यह कदम ट्रांसअटलांटिक संबंधों में तनाव कम करने वाला लगता है। बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है, क्योंकि टैरिफ की अनिश्चितता कम हुई। हालांकि, कई विश्लेषक इसे “अस्थायी राहत” मानते हैं, क्योंकि विस्तृत समझौता अभी बाकी है।
ट्रंप ने डावोस में ही कहा था कि वे सैन्य बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे, लेकिन स्वामित्व या नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए बातचीत चाहते हैं। अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है—यह सिर्फ एक फ्रेमवर्क है, जिस पर आगे चर्चाएं होंगी।






