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January 28, 2026 8:05 am

Trump Tariff Impact: टैर‍िफ लगते ही जर्मनी ने पीछे खींचे कदम, ग्रीनलैंड से बुलाई सेना, मगर 8 देश अभी भी अड़े

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यहाँ आपके दिए गए हिंदी न्यूज़ स्टाइल में एक ताज़ा और विस्तृत हिंदी न्यूज़ अपडेट तैयार किया गया है, जो वर्तमान घटनाओं (जनवरी 2026) पर आधारित है। यह वास्तविक रिपोर्ट्स से प्रेरित है, जिसमें ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीदने की मांग, यूरोपीय देशों की सैन्य तैनाती, टैरिफ धमकी और जर्मनी की वापसी शामिल है।

लंदन/ब्रुसेल्स/कोपेनहेगन/वाशिंगटन: ग्रीनलैंड विवाद अब ट्रांसअटलांटिक संबंधों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के 8 सहयोगी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी को अमल में लाने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं, जबकि यूरोपीय देश एकजुट होकर इसका मुकाबला करने की तैयारी कर रहे हैं।

ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐलान किया कि 1 फरवरी 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड से आने वाले सभी सामानों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। अगर ग्रीनलैंड को अमेरिका को “पूर्ण और स्थायी” रूप से बेचने का समझौता नहीं हुआ, तो यह टैरिफ 1 जून से बढ़कर 25% हो जाएगा। ट्रंप ने इसे ग्रीनलैंड की “सुरक्षा और रणनीतिक महत्व” के लिए जरूरी बताया है, जहां अमेरिका पहले से ही थुले एयर बेस (Pituffik Space Base) संचालित करता है।

इस बीच, जर्मनी ने तनाव कम करने का संकेत दिया है। एबीसी न्यूज और जर्मन मीडिया (DPA, Die Welt) के अनुसार, जर्मन सेना की 15 सदस्यीय टोही टीम (reconnaissance team) ने ग्रीनलैंड से वापसी शुरू कर दी है। ये सैनिक शुक्रवार को पहुंचे थे और रविवार को सिविलियन फ्लाइट से कोपेनहेगन के लिए रवाना हो रहे हैं। जर्मन सेना के प्रवक्ता ने कहा कि मिशन “आदेशानुसार पूरा” हो गया है और परिणाम संतोषजनक हैं, लेकिन ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद इसे राजनीतिक दबाव का नतीजा माना जा रहा है।

हालांकि, बाकी 7 देश अभी भी अपनी मुद्रा में अडिग हैं। इन देशों ने हाल ही में डेनमार्क के निमंत्रण पर ग्रीनलैंड में छोटी-छोटी सैन्य टुकड़ियां (military contingents) भेजी थीं, ताकि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत की जा सके। ये तैनातियां ‘Arctic Endurance’ जैसे अभ्यासों का हिस्सा हैं, लेकिन ट्रंप ने इन्हें “खतरनाक खेल” करार दिया।

यूरोपीय संघ के राजदूतों ने रविवार को ब्रुसेल्स में आपात बैठक की, जहां उन्होंने ट्रंप की धमकी को “ब्लैकमेल” बताया और जवाबी कार्रवाई की तैयारी पर सहमति जताई। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिकसेन ने कहा, “यूरोप ब्लैकमेल नहीं सहेगा।” 8 प्रभावित देशों ने संयुक्त बयान जारी कर चेतावनी दी कि यह कदम “ट्रांसअटलांटिक संबंधों को खतरनाक नीचे की ओर ले जाएगा” (dangerous downward spiral)।

यूरोपीय संघ ने जवाबी टैरिफ पैकेज तैयार किया है, जिसमें अमेरिकी सामानों पर 93 अरब यूरो तक के काउंटर-टैरिफ शामिल हैं, जो फरवरी के बाद लागू हो सकते हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप से फोन पर बात कर कहा कि NATO सहयोगियों पर टैरिफ गलत है।

ग्रीनलैंड के लोग और सरकार भी विरोध में उतरे हैं। नूक (Nuuk) में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज करते हुए स्वतंत्रता और डेनमार्क के साथ रहने की मांग की। ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री ने यूरोपीय समर्थन का स्वागत किया।

विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद NATO गठबंधन को सबसे गंभीर चुनौती दे रहा है। अमेरिकी सांसदों (जैसे थॉम टिलिस, लिसा मर्कोव्स्की) ने भी ट्रंप की नीति की आलोचना की है, चेतावनी दी कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को नुकसान होगा।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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