Gem capital India: भारत के हर शहर को खास पहचान मिली हुई है यानि वह शहर किसी उपनाम से जरूर जाना जाता है. कोई शहर अपनी अनोखी संस्कृति के लिए देशभर में मशहूर है या फिर कई शहरों ने साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशने के क्षेत्रों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. लेकिन क्या आपको पता भारत की रत्न राजधानी किसे कहते है? आइए जानते है इस आर्टिकल में.
भारत की रत्न राजधानी
भारत की पिंक सिटी के नाम से मशहूर राजस्थान की राजधानी जयपुर को देश के साथ ही दुनिया में भारत की रत्न राजधानी कहलाती है. इसकी वजह भी बेहद दिलचस्प बताई जाती है. क्योंकि इस शहर में आपको ज्योतिष में इस्तेमाल होने वाले लगभग हर तरह के रत्न मिल जाते हैं. चाहे ज्यादा दाम वाले माणिक, पन्ना, नीलम हों या फिर कम कीमत में अमेथिस्ट, सिट्रीन, गार्नेट जैसे रत्न की बात हों.
इस शहर की खास बात की यहां आपके बजट के हिसाब से रत्न आसानी से उपलब्ध होते हैं. अगर आप कम कीमत में शानदार ज्योतिषीय रत्न या फिर कमर्शियल क्वालिटी के स्टोन की खोज कर रहे हैं, तो जयपुर से अच्छा ऑप्शन भारत कोई शहर नहीं हो सकता हैं.
जौहरी मार्केट रत्न-आभूषण का हब
जयपुर का जौहरी मार्केट शहर का सबसे पुराना और सबसे बड़ा रत्न-आभूषण हब बना हुआ है. यहां सैकड़ों की संख्या में शॉप्स शोरूम मौजूद हैं. गोपाल जी और पिटलीयों नाम की ये दोनों गलियां जौहरी मार्केट के भीतर हैं. जहां अधिकांश थोक बिजेनसमैन और ज्योतिष रत्न का ठिकाना है. रिपोर्ट्स की मानें, तो यहां 500-1000 रुपये प्रति कैरेट के हिसाब से सेमी-प्रीशियस और कमर्शियल ग्रेड के रत्न मिलते हैं.
रत्न राजधानी का इतिहास
भारत की रत्न राजधानी श्रेय महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय को जाता है. जब महाराजा जयसिंह साल 1727 में शहर बनाते है, तब उन्होंने जौहरियों और दूसरे कारीगरों के लिए मोहल्ले तय किए. महाराजा जयसिंह ने लाहौर, बनारस, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों से ज्वेलर्स को बुलाया और उन्हें यहां जौहरी मार्केट में दुकानें और काम शुरू करने में मदद दी. इससे उनकी कला को अच्छा बढ़ावा मिला.
इसी प्रकार, उन्होंने सोना-चांदी की पन्नी तैयार करने वाले करीगरों अफगानिस्तान से बुलाया और उन्हें इस शहर में जगह दी. आज भी शहर पन्नी काम के लिए काफी फेमस है.






