नई दिल्ली, 25 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने आज NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में शामिल “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” अध्याय के अंदर “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” वाले हिस्से पर गंभीर चिंता जताई। CJI सूर्यकांत ने खुद संज्ञान लेते हुए कहा, “बदनाम करने की इजाजत नहीं दे सकते… मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा और मैं इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करूंगा।”
यह किताब 23 फरवरी 2026 को जारी की गई थी, जिसमें पहली बार कक्षा 8 स्तर पर न्यायपालिका की चुनौतियों में भ्रष्टाचार, केसों का भारी बैकलॉग (53 करोड़ से ज्यादा पेंडिंग केस), जजों की कमी और गरीबों के लिए न्याय तक पहुंच जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया है। किताब में पूर्व CJI बी.आर. गवई के जुलाई 2025 के बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की घटनाओं को स्वीकार किया था और पारदर्शिता व जवाबदेही पर जोर दिया था।
इस बीच, सीनियर एडवोकेट और कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल ने भी किताब पर सवाल उठाए थे, पूछा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का जिक्र क्यों, जबकि राजनीतिज्ञों, मंत्रियों और जांच एजेंसियों में भ्रष्टाचार पर चुप्पी क्यों?
NCERT की किताब अब विवादों में है और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, इसे बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जल्द करने का संकेत दिया है।





