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February 1, 2026 12:12 pm

डिप्टी सीएम का पद, एनसीपी के दिग्गज नेता या कुछ और? सुनेत्रा पवार के आगे होगी ये चुनौती

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अजित पवार के अचानक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उथल-पुथल मचा हुआ है। 28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान दुर्घटना में 66 वर्षीय अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी, जिसने एनसीपी (अजित पवार गुट) और महायुति गठबंधन को गहरा झटका दिया। इस घटना से राज्य में सत्ता का संतुलन बिगड़ गया है, और इसे स्थिर होने में समय लगेगा।

अब, पार्टी और महायुति गठबंधन ने सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री पद सौंपा है। 31 जनवरी 2026 को मुंबई के लोक भवन (या राजभवन) में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें शपथ दिलाई। महाराष्ट्र के गठन के बाद सुनेत्रा पवार पहली महिला हैं जिन्हें उप मुख्यमंत्री का पद मिला है—यह राज्य के इतिहास में ऐतिहासिक क्षण है।

सुनेत्रा पवार को मिले विभाग

  • राज्य उत्पाद शुल्क (Excise)
  • खेल एवं युवा कल्याण (Sports and Youth Welfare)
  • अल्पसंख्यक विकास एवं औकाफ (Minority Development and Aukaf)

वित्त विभाग (Finance) फिलहाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है, क्योंकि राज्य बजट सत्र नजदीक है। एनसीपी विधायकों की मांग है कि सुनेत्रा को अजित पवार के सभी विभाग मिलें, लेकिन अभी अस्थायी व्यवस्था है।

सुनेत्रा पवार के सामने प्रमुख चुनौतियां

  1. राजनीतिक अनुभव की कमी: सुनेत्रा पवार मुख्य रूप से सामाजिक कार्यकर्ता रही हैं—वे राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन विधानसभा या बड़े प्रशासनिक पदों पर कभी नहीं रहीं। अजित पवार जैसे अनुभवी और मजबूत नेता की जगह भरना आसान नहीं। उन्हें जल्दी से राजनीतिक निर्णय लेने, विधायकों को संभालने और गठबंधन में अपनी जगह बनाने की चुनौती है।
  2. पार्टी में एकजुटता बनाए रखना: अजित पवार के निधन से एनसीपी में नेतृत्व का संकट है। छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन उनका प्रभाव सीमित। सुनेत्रा को पार्टी के विभिन्न गुटों (जैसे बारामती-आधारित कार्यकर्ता, पश्चिम महाराष्ट्र के विधायक) को एकजुट रखना होगा। शरद पवार गुट (एनसीपी-एसपी) से अलगाव और संभावित विलय की चर्चाएं भी जटिलता बढ़ा रही हैं—शरद पवार ने कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी नहीं थी।
  3. महायुति गठबंधन में संतुलन: भाजपा (देवेंद्र फडणवीस) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे) के साथ समन्वय बनाना। अजित पवार मजबूत सौदेबाज थे; सुनेत्रा को विभागों, संसाधनों और चुनावी रणनीति पर प्रभाव बनाए रखना होगा। जिला परिषद-पंचायत समिति चुनाव (5 फरवरी से) और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उनकी परीक्षा होगा।
  4. व्यक्तिगत और भावनात्मक दबाव: पति की अकाली मौत के दुख में शोक मनाते हुए इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालना। कार्यकर्ताओं में ‘अजितदादा अमर रहे’ के नारे के बीच उन्हें अजित की विरासत को आगे बढ़ाने का वादा किया है, लेकिन भावनात्मक रूप से यह मुश्किल है।
  5. सार्वजनिक छवि और विपक्षी हमले: विपक्ष (महाराष्ट्र विकास अघाड़ी) ‘परिवारवाद’ और ‘कुर्सी की जल्दबाजी’ पर हमला कर सकता है। सुनेत्रा को अपनी छवि को मजबूत करना होगा—सामाजिक कार्य से राजनीति में ट्रांजिशन साबित करना।

आगे क्या?

  • सुनेत्रा पवार ने शपथ के बाद कहा कि वे “अजित की विरासत को आगे बढ़ाएंगी और महाराष्ट्र के लिए अथक काम करेंगी”। कार्यकर्ताओं ने भावुक होकर ‘अजितदादा अमर रहे’ के नारे लगाए।
  • एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला अस्थिरता को कम करने के लिए है, लेकिन लंबे समय में पार्टी का भविष्य सुनेत्रा की क्षमता पर निर्भर करेगा।
  • राज्य में शोक की लहर है, लेकिन राजनीति रुकती नहीं—अब सुनेत्रा पवार की अगुवाई में एनसीपी कैसे मजबूत होती है, यह देखना दिलचस्प होगा।
DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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