
जनवरी 24, बुधवार “जिह्वा सुलगती अग्नि है, और वाचालता घातक विष है। भौतिक अग्नि शरीर को भस्म करती है जबकि जिह्वा की आग हृदय और

हे अस्तित्व के पुत्र ! स्वयं को सांसारिकता में लिप्त न रख, क्योंकि अग्नि से हम स्वर्ण की और स्वर्ण से हम अपने सेवक की

हे मनुष्य के पुत्र ! यदि तुझे अपार वैभव प्राप्त हो जाए तो हर्षोन्मादि हो और यदि तुझ पर दुर्भाग्य टूट पड़े तो शोकाकुल न

हे चेतना के पुत्र ! तेरे लिए शांति नहीं है सिवाय इसमें कि तू अपने आपको तज दे और मेरी ओर अभिमुख हो, क्योंकि तुझे

हे मनुष्य के पुत्र ! जब तक तू स्वयं पाप कर्म में लिप्त है, दूसरे पापों का विचार भी न कर । यदि तूने इस
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