
प्रभा की धारा मचल रही है करने को अभिषेक तिरंगा लहर रहा हर घर तिरंगा फहर रहा घर- घर । हर्षित तन है मन है

‘देवाधिदेव महादेव” हे! देवा धि देव महादेव। आशुतोष हो ,कृपालु हो , तुम दयालु हो, कृपालु हो , मृत्युंजय हो ,त्र्यंबक हो, महेश हो ,विश्वेश
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