डिजिटल डेस्क, जयपुर।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार टैरिफ धमकियां दुनिया के शेयर बाजारों को संभलने का मौका नहीं दे रही हैं। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के विरोध में 8 यूरोपीय देशों (डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड्स और फिनलैंड) पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगा। अगर ग्रीनलैंड डील में रुकावट आई तो 1 जून से यह 25% तक बढ़ सकता है। इसके अलावा, ट्रंप ने फ्रांस की वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ की धमकी देकर बाजारों में और हड़कंप मचा दिया है।
इस टैरिफ बम के असर से वैश्विक शेयर बाजारों में भगदड़ मची हुई है। 21 जनवरी 2026 को एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होते ही भारी गिरावट देखी गई, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है।
एशियाई बाजारों में क्रैश
- जापान: निक्केई 225 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 1.28% से ज्यादा गिरा, 796 अंकों की भारी गिरावट के साथ 52,194 तक फिसला और बाद में 52,693 पर ट्रेड कर रहा था।
- दक्षिण कोरिया: कोस्पी इंडेक्स 1% से अधिक गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक में 2.2% की तेज गिरावट दर्ज की गई।
- ऑस्ट्रेलिया: S&P/ASX 200 इंडेक्स 0.32% नीचे खुला और रेड जोन में ट्रेडिंग जारी रही।
- अन्य एशियाई बाजार जैसे हांगकांग का हैंग सेंग भी 112 अंकों की गिरावट के साथ 26,423 पर पहुंचा।
अमेरिकी बाजार पर असर पिछले कारोबारी दिन (मंगलवार) अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई। डाउ जोंस 870 अंकों की गिरावट के साथ 48,509 पर बंद हुआ, जबकि S&P 500 143 अंकों (2.1%) और नैस्डैक 2.4% टूटकर क्रमशः 6,817 और 22,954 पर बंद हुए। यह अक्टूबर के बाद सबसे खराब दिन था, जिसमें S&P 500 से 1.2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की वैल्यू मिट गई।
भारतीय बाजार में क्या स्थिति? भारतीय शेयर बाजार भी ट्रंप की टैरिफ धमकियों से प्रभावित है। 21 जनवरी को सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले। सेंसेक्स 200 अंकों से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी 25,200 के नीचे ट्रेड कर रहा था। पिछले दिन (मंगलवार) सेंसेक्स 1,066 अंकों की गिरावट के साथ 82,180 पर और निफ्टी 353 अंकों की गिरावट के साथ 25,232 पर बंद हुआ था। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ वॉर की आशंका से निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिससे जोखिम वाले एसेट्स से पैसा सुरक्षित जगहों जैसे सोना और चांदी की ओर जा रहा है।
ट्रंप की यह रणनीति ग्रीनलैंड अधिग्रहण से जुड़ी है, जिसे यूरोपीय सहयोगी “ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करने वाला” बता रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टैरिफ बढ़ते रहे तो वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति बन सकती है, जिससे अर्थव्यवस्थाओं पर लंबे समय तक असर पड़ेगा।






