नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हो गया है। मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मौजूदगी में इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा की गई। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया जा रहा है, क्योंकि यह वैश्विक GDP के करीब 25% और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोगों का बाजार शामिल है।
समझौते की मुख्य बातें
- भारत के 99% से अधिक निर्यात को EU बाजार में शून्य या बहुत कम टैरिफ पर पहुंच मिलेगी।
- EU से आयात होने वाले 97% उत्पादों पर टैरिफ में कटौती या समाप्ति, जिससे EU को हर साल 4 अरब यूरो की बचत होगी।
- टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, एयरोस्पेस, चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा।
- संवेदनशील क्षेत्र जैसे डेयरी, अनाज, पोल्ट्री और कुछ फल-सब्जियां सुरक्षित रखे गए हैं।
- सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा और भौगोलिक संकेतकों (GI) पर मजबूत प्रावधान।
- साथ ही सुरक्षा और रक्षा साझेदारी तथा भारतीय प्रतिभा की मोबिलिटी पर अलग समझौते।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा FTA” बताया और कहा कि यह साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट है, जो वैश्विक अस्थिरता के समय दुनिया को स्थिरता प्रदान करेगा। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “सभी सौदों की जननी” कहा और जोर दिया कि यह 2 अरब लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
स्टॉक मार्केट पर असर समझौते की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखा गया। कई सेक्टर्स के शेयर रॉकेट की तरह उछले:
- टेक्सटाइल कंपनियां (जैसे अरविंद, वेलस्पन, ट्रेंट) में 10-20% तक की तेजी।
- फार्मा (सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला) और केमिकल्स (उल्ट्राटेक, टाटा केमिकल्स) में मजबूत खरीदारी।
- ऑटो (टाटा मोटर्स, महिंद्रा) और आईटी-सर्विसेज में भी सकारात्मक रुख।
- निर्यात-उन्मुख कंपनियां जैसे जेम्स एंड ज्वेलरी (टाइटन) और लेदर (बाटा, मिरजा) के शेयरों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजन (खासकर टेक्सटाइल में 60-70 लाख नौकरियां) करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत बनाएगा। साथ ही, अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनावों के बीच यह भारत-EU के लिए रणनीतिक कदम है।






