संसद के बजट सत्र में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का तीखा हमला जारी है। कांग्रेस के उप नेता और असम के सांसद गौरव गोगोई ने इस मामले में सबसे प्रमुख भूमिका निभाई है। उन्होंने स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष ने “दुखी मन से” यह अविश्वास प्रस्ताव लाया है। उनका यह बयान संसद में चर्चा के दौरान आया, जहां उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि लोकसभा की गरिमा, संविधान की मर्यादा और सदन की निष्पक्षता की रक्षा के लिए मजबूरी में उठाया गया है।
घटना की पृष्ठभूमि
बजट सत्र के दूसरे चरण में (मार्च 2026 के आसपास) विपक्षी दलों (मुख्य रूप से INDIA गठबंधन) ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस दिया। इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। प्रस्ताव कांग्रेस सांसदों के. सुरेश, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव को सौंपा था। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि स्पीकर ने बार-बार विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने से रोका, उनकी बात को बीच में काटा और पक्षपात दिखाया। गौरव गोगोई ने दावा किया कि राहुल गांधी को 20 बार बोलने नहीं दिया गया, जिससे लोकतंत्र और संसदीय परंपराओं का हनन हुआ।
गौरव गोगोई का प्रमुख बयान
लोकसभा में चर्चा के दौरान गौरव गोगोई ने भावुक होकर कहा कि “हम दुखी मन से यह प्रस्ताव लाए हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा:
- यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि सदन की मर्यादा बचाने के लिए है।
- स्पीकर का रवैया खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है, जो संविधान के अनुच्छेद 94 और संसदीय नियमों के खिलाफ है।
- विपक्ष मजबूर होकर यह कदम उठा रहा है, क्योंकि स्पीकर ने विपक्ष की आवाज दबाने का काम किया।
- देश का नेतृत्व कमजोर और बुजदिल हो गया है, जो संसद में बहस से भागता है।
उन्होंने आगे कहा कि स्पीकर पर यह प्रस्ताव सदन की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बहाल करने के लिए आवश्यक है। गौरव गोगोई के साथ मनीष तिवारी, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और जोथिमणि जैसे सांसद भी प्रस्ताव के पक्ष में बोलने वाले हैं।
सरकार और सत्ता पक्ष का जवाब
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव राजनीतिक स्टंट है और स्पीकर ओम बिरला ने हमेशा निष्पक्षता से काम किया है। सत्ता पक्ष ने दावा किया कि विपक्ष हंगामा करके सदन नहीं चलने दे रहा और बजट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से भाग रहा है। स्पीकर ने भी सदन की कार्यवाही संभालते हुए कहा कि सभी सदस्यों को बोलने का अधिकार है, लेकिन व्यवस्था बनाए रखनी जरूरी है।
सदन में क्या हुआ?
- प्रस्ताव पेश होने के बाद 10 घंटे से अधिक की बहस हुई।
- कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि 50 से ज्यादा विपक्षी सांसदों ने पक्ष में वोट किया, लेकिन प्रस्ताव पास होने की संभावना कम है क्योंकि NDA के पास बहुमत है।
- सदन में हंगामा, नारेबाजी और स्थगन के दौर चले।
- विपक्ष ने अन्य मुद्दों जैसे ईरान युद्ध, चुनाव आयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी बहस की मांग की, लेकिन स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव मुख्य केंद्र रहा।
निष्कर्ष
यह घटना भारतीय संसद के इतिहास में दुर्लभ है, जहां स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया हो। गौरव गोगोई का “दुखी मन से प्रस्ताव लाए” वाला बयान विपक्ष की भावनाओं को दर्शाता है—वे इसे मजबूरी मानते हैं, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी समझते हैं। यह बजट सत्र में सियासी टकराव का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है, जहां विपक्ष सरकार और स्पीकर पर लगातार हमला बोल रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है। संसद की कार्यवाही प्रभावित हो रही है और बहस जारी है।






