विश्व मृदा दिवस आज: 2012 से ही मृदा उत्सव मनाती है हमारी सरकार: ममता

 
विश्व मृदा दिवस आज: 2012 से ही मृदा उत्सव मनाती है हमारी सरकार: ममता

कोलकाता। विश्व मृदा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि राज्य सरकार 2012 से ही पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में मृदा उत्सव मना रही है। विश्व मृदा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने इस बारे में बुधवार को एक बयान जारी किया इसमें उन्होंने कहा है, 'आज विश्व मृदा दिवस है। मैं कहना चाहती हूं कि पश्चिम बंगाल सरकार 2012 से ही प्रत्येक क्षेत्र में माटी उत्सव का पालन करती है। इस दौरान कृषि, मत्स्य पालन, तांत, पर्यटन, संस्कृति सहित ग्राम बांग्ला की विभिन्न खूबियों को संरक्षित करने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम किए जाते हैं।'

ज्ञात हो कि विश्व मिट्टी या मृदा दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर वर्ष पांच दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य किसानों और आम लोगों को मिट्टी की महत्ता के बारे में जागरूक करना है। विश्व के बहुत से भागों में उपजाऊ मिट्टी बंजर है। किसानों द्वारा ज्यादा रसायनिक खादों और कीड़े मारने वाली दवाओं का इस्तेमाल करने से मिट्टी के जैविक गुणों में कमी आने के कारण इसकी उपजाऊ क्षमता में गिरावट आ रही है| वह प्रदूषण का भी शिकार हो रही है। 

इसलिए किसानों और आम जनता को इसकी सुरक्षा के लिए जागरूक करने की जरूरत है। 20 दिसंबर 2013 को प्रति वर्ष पांच दिसंबर को विश्व मिट्टी दिवस मनाने का फैसला लिया गया था। पांच दिसंबर, 2017 को संपूर्ण विश्व में ‘विश्व मृदा दिवस’ मनाया गया। वर्ष 2017 में इस दिवस का मुख्य विषय “ग्रह की देख-भाल भूमि से शुरू होती है- था। इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों से मिट्टी के नियमित परीक्षण हेतु ‘स्वस्थ धरा, खेत हरा’ के माध्यम से आह्वान किया। 

वर्तमान में विश्व की संपूर्ण मृदा का 33 प्रतिशत पहले से ही बंजर या निम्नीकृत हो चुका है। उल्लेखनीय हैं कि हमारे भोजन का 95 प्रतिशत भाग मृदा से ही आता है। वर्तमान में 815 मिलियन लोगों का भोजन असुरक्षित है और 2 अरब लोग पोषक रूप से असुरक्षित हैं, लेकिन हम इसे मृदा के माध्यम से कम कर सकते हैं। 

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इस दिवस का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य के प्रति तथा जीवन में मृदा के योगदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। 20 दिसंबर, 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक संकल्प द्वारा पांच दिसंबर को प्रतिवर्ष ‘विश्व मृदा दिवस’ मनाने की घोषणा की थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसी संकल्प के माध्यम से वर्ष 2015 को ‘अंतरराष्ट्रीय मृदा वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

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