पूरा घटनाक्रम क्या है?
- गिरफ्तारी की शुरुआत: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम (लगभग 15-20 जवान, सादे कपड़ों में) बुधवार तड़के शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिड़गांव क्षेत्र में एक रिसॉर्ट/होटल पहुंची। यहां ठहरे तीन युवा कांग्रेस पदाधिकारी—सौरभ सिंह (उत्तर प्रदेश), अरबाज खान (उत्तर प्रदेश) और सिद्धार्थ अवधूत (मध्य प्रदेश)—को AI समिट में प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। टीम ने होटल के CCTV DVR और रजिस्टर भी जब्त किए।
- हिमाचल पुलिस का हस्तक्षेप: हिमाचल पुलिस का दावा है कि दिल्ली पुलिस ने स्थानीय पुलिस को सूचना दिए बिना और उचित प्रक्रिया (जैसे ट्रांजिट रिमांड या लोकल अथॉरिटी को जानकारी) का पालन किए बिना कार्रवाई की, जिसे उन्होंने गैरकानूनी और अपहरण जैसा बताया। होटल मालिक की शिकायत पर चिड़गांव थाने में FIR दर्ज की गई, जिसमें दिल्ली पुलिस के जवानों पर अपहरण, घर में घुसना, गलत तरीके से हिरासत, चोरी जैसी धाराएं (BNS की धारा 140(3), 127(2), 329(4), 305 आदि) लगाई गईं।
- टकराव और रोक: दिल्ली पुलिस तीनों कार्यकर्ताओं को लेकर दिल्ली रवाना हुई, लेकिन हिमाचल पुलिस ने उन्हें सोलन और फिर शोघी बैरियर (शिमला के पास NH-5 पर) पर दो बार रोका। दिल्ली पुलिस की टीम को कई घंटों तक हिरासत में रखा गया, वाहनों को रोका गया और बहस हुई। मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां ट्रांजिट रिमांड पर सुनवाई हुई।
- कोर्ट और अंतिम स्थिति: देर रात कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड मंजूर की, लेकिन हिमाचल पुलिस ने FIR के आधार पर जांच की मांग की। लगभग 18-24 घंटे के हाईवोल्टेज ड्रामा के बाद गुरुवार सुबह दिल्ली पुलिस टीम तीनों आरोपियों के साथ दिल्ली रवाना हुई। अगली सुनवाई दिल्ली में होनी है।
यह घटना दो राज्यों की पुलिस के बीच दुर्लभ टकराव का उदाहरण है, जहां प्रक्रियागत नियमों (inter-state arrest procedure) को लेकर विवाद हुआ। हिमाचल पुलिस (कांग्रेस शासित राज्य) ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को नियम-विरुद्ध बताया, जबकि दिल्ली पुलिस ने इसे वैध गिरफ्तारी करार दिया।
यह पूरा प्रकरण राजनीतिक रंग भी ले चुका है, क्योंकि युवा कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
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