हाल की घटनाओं से स्पष्ट है कि ईरान के अधिकारी एक बहाई कैदी को दूसरे के खिलाफ सबूत गढ़ने के लिए यातना दे रहे हैं। इससे यह चिंता बढ़ रही है कि ईरान का इस्लामी गणराज्य बहाइयों पर और अधिक सख़्ती बरतने में जुट गया है।
जेनेवा—10 अप्रैल 2026—ईरान के 29-वर्षीय बहाई नागरिक और तीन वर्ष की एक बच्ची के पिता, बोर्ना नईमी को 1 मार्च को करमान में उनकी गिरफ्तारी के बाद से कम से कम दो बार मॉक फांसी और अन्य प्रकार की यातनाएं दी गई हैं जिनमें बिजली के झटके भी शामिल हैं जिससे उनके पैर में गंभीर रूप से जलन है। उनके साथ और इसी तरह के व्यवहार का सामना करने वाले एक अन्य युवा बहाई के साथ किए गए सलूक से ईरान में बहाइयों पर किए जा रहे अत्याचार में वृद्धि को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। उल्लेखनीय है कि बहाई समुदाय ईरान का सबसे बड़ा गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है। हिरासत के शुरुआती दिनों में बोर्ना को बार-बार पीटा गया जिससे उनके बगल के हिस्सों, पसलियों, सीने के नीचे और पीठ पर कई चोटें लगीं। उन्हें कई बार उनके निवास-स्थान के पास की जगहों पर ले जाया गया, जहां उन्हें उनकी पत्नी और छोटी बेटी को लेकर धमकियां दी गईं। इन धमकियों में यह भी शामिल था कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उनकी बच्ची को सरकारी अनाथालय भेज दिया जाएगा।
बोर्ना को इतनी भीषण यातनाएं दी गईं कि उन्हें एक झूठे इकबालिया बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया जिसमें उन्होंने 8 जनवरी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान बासिज गार्डों की हत्या में खुद को और अपने चचेरे भाई पेवंद नईमी को फंसाया। इस आरोप का कोई सबूत मौजूद नहीं है। इसके अलावा, बोर्ना और पेवंद में से कोई भी इस अपराध को अंजाम नहीं दे सकता था क्योंकि ये घटनाएं पेवंद की गिरफ्तारी के बाद और उस समय घटित हुई थीं जब बोर्ना अपने घर पर परिवार के साथ था। जोर-जबर्दस्ती से लिए गए इस इकबालिया बयान का पाठ पहले से तैयार किया गया था और उन्हें पढ़ने के लिए दिया गया था। दोनों कैदियों के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं चलाया गया है।
बोर्ना और उसकी छोटी बेटी का रिश्ता बेहद गहरा है। उसकी बेटी पर डाले गए निर्मम मनोवैज्ञानिक दबावों का एकमात्र उद्देश्य बोर्ना को मानसिक रूप से तोड़कर उससे उन अपराधों को कबूल करवाना है जो उसने किए ही नहीं हैं। इस स्थिति से उसकी बेटी को गहरा आघात पहुंचा है जो सोचती है कि उसके पिता ने उसे छोड़ दिया है। बाकी कैदी बोर्ना को एक ऐसे बंदी के रूप में जानते हैं जो अपनी बेटी के चित्र और कपड़े अपने पास की दीवार पर टांग कर रखता है।
संयुक्त राष्ट्र, जेनेवा, में बहाई अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिनिधि सिमिन फ़हांदेज ने कहा, “इस परिवार की दुर्दशा देखकर दिल में घोर पीड़ा होना लाज़मी है जिन्हें केवल अपने धर्म के कारण ऐसी क्रूरता झेलनी पड़ रही है। इतिहास न सिर्फ़ ईरान के इस्लामी गणराज्य के निर्मम अपराधों को याद रखेगा, बल्कि उन युवाओं की हिम्मत और बहादुरी को भी जो अपने विश्वास और आस्था के बल पर सरकार के सामने अडिग रहते हुए अपने धर्म पर कायम रहे, जबकि सरकार ने उन्हें कुचल देने में
कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।”
जेल में अपने शुरुआती दिनों के दौरान, बोर्ना को जेल के एक खास हिस्से में रखा गया था जिसे “सुइट” —यानी “मृत्यु कक्ष”—कहा जाता था, जहां मृत्युदंड पाए कैदियों को फांसी से 48 घंटे पहले रखा जाता था। रिपोर्टों से पता चलता है कि इस दौरान उन्हें लगभग 2×2 मीटर के एक छोटे से कमरे में एकांत कारावास में रखा गया था जहां रात और दिन के बीच का अंतर भी पता नहीं चल पाता था। इसके बाद भी बोर्ना को व्यापक यातनाएं दी गईं जिसमें बिजली के झटके भी शामिल थे, जिनका इस्तेमाल इतनी बार किया गया कि उनके पैरों में जलने के निशान पड़ गए।
बोर्ना को दी गई मॉक फांसी के बाद वही बर्ताव किए गए जो पेवंद के खिलाफ किए गए थे और जिसके बारे में बहाई अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की 24 मार्च की रिपोर्ट में बताया गया है। इस तरह के मामले ईरान के बहाई समुदाय पर बढ़ते अत्याचार और हिंसा को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न करते हैं। ईरान की सरकार उन्हें देश में व्याप्त संकट के लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रही है। बढ़ते उत्पीड़न को लेकर चिंता तब और बढ़ जाती है जब अधिकारी जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों और मौजूदा संघर्ष के लिए बहाई समुदाय पर दोष मढ़ने का कुचक्र चला रहे हैं। सुश्री फ़हांदेज ने कहा, “बोर्ना और पेवंद के साथ जो बर्ताव किया गया है वह इस्लामी गणराज्य द्वारा बहाई लोगों के खिलाफ झूठे आरोप गढ़ने और उन्हें उन अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराने के
निर्मम प्रयासों का स्पष्ट संकेत है जो अपराध उन्होंने कभी किए ही नहीं हैं।”
“इससे ईरान में बहाई समुदाय के प्रति वहां की सरकार द्वारा की जा रही साजिशों और बदनीयती को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न होती हैं जिन्हें राष्ट्रीय संकट के क्षणों में बार-बार बलि का बकरा बनाया जाता है ताकि सरकार द्वारा किए जा रहे दमन से ध्यान भटकाया जा सके। ऐसे कृत्य न केवल निर्दोष लोगों के जीवन जोखिम में डालते हैं बल्कि ऐसे सुनियोजित अत्याचार के फंदे को और मजबूत बनाते हैं जिसका उद्देश्य एक पूरे अल्पसंख्यक समुदाय को अलग-थलग करना, उनकी मानवीय गरिमा का हनन करना और उन्हें खामोश कर देना है।”
पृष्ठभूमि
● बोर्ना को उनके कार्यस्थल पर इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) खुफिया संगठन के छः नकाबपोश अधिकारियों ने गिरफ्तार किया। उन्हें हथकड़ी पहनाकर आईआरजीसी के हिरासत केंद्र ले जाया गया लेकिन उनके परिवार को तीन दिनों तक उनके ठिकाने या हालचाल के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद संक्षिप्त फोन कॉल की अनुमति दी गई लेकिन 8 मार्च के बाद अगले सप्ताह तक वह भी बंद कर दिया गया। बोर्ना कराटे के एक कुशल खिलाड़ी हैं, जिन्होंने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीते हैं।
● पेवंद को जनवरी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान अशांति फैलाने और बासिज अधिकारियों की हत्या के आरोप में 8 जनवरी को पहली बार गिरफ्तार किया गया, यातनाएं दी गईं और दो बार मॉक फांसी दी गई। 1 मार्च को उनकी गिरफ्तारी के बाद, बोर्ना पर पेवंद के साथ होने और कथित हत्याओं में शामिल होने का निराधार आरोप लगाया गया जबकि पेवंद को कथित घटना से पहले ही 8 जनवरी को गिरफ़्तार किया गया था, और उक्त अपराध के
समय बोर्ना अपने घर पर थे।
● पेवंद से जबरन लिया गया झूठा इकबालिया बयान 1 फरवरी को सरकारी टेलिविजन पर प्रसारित किया गया था। दर्जनों अंतर्राष्ट्रीय अधिकारियों, सांसदों, प्रमुख हस्तियों और मानवाधिकार समूहों ने पेवंद की रिहाई की मांग की है।
● जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद बहाइयों को बलि का बकरा बनाने के ईरानी सरकार के प्रयासों के तहत चार बहाइयों को करमान जेल में कैद किया गया है: पेवंद नईमी, बोर्ना नईमी, शकीला घासेमी, और अदीब शाहबाज़पूर।






