मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में एक बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और वाशिंगटन पोस्ट, CNN, AP जैसी प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों (वारशिप्स, एयरक्राफ्ट, रडार सिस्टम और बेस) की रीयल-टाइम लोकेशन और टारगेटिंग इंटेलिजेंस दे रहा है। इसके अलावा, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों (जैसे Zolfaghar, Fateh-110) में रूसी तकनीक के ‘फिंगरप्रिंट’ मिले हैं – रूस ने इन मिसाइलों को अपग्रेड किया है ताकि पैट्रियट और THAAD जैसे अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम से बच सकें। यह खुलासा युद्ध को और जटिल बना रहा है, क्योंकि रूस यूक्रेन युद्ध में ईरानी ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुका है – अब बदले में ईरान को सपोर्ट कर रहा है।
रूस की छिपी भूमिका का खुलासा
- सैटेलाइट और इंटेलिजेंस सपोर्ट: अमेरिकी अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि रूस ईरान को सैटेलाइट इमेजरी, रडार सिग्नल, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और रीयल-टाइम लोकेशन डेटा दे रहा है। ईरान के पास खुद की सीमित सैटेलाइट नेटवर्क है, इसलिए रूस की मदद से ईरान अमेरिकी ठिकानों (जैसे बहरीन में US Fifth Fleet HQ, कतर में रडार सिस्टम, जॉर्डन, UAE और सऊदी अरब में THAAD मोबाइल रडार) पर ज्यादा सटीक हमले कर पा रहा है।
- मिसाइलों में रूसी फिंगरप्रिंट: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों में रूसी अपग्रेड मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस ने अपनी Iskander मिसाइलों की तकनीक (ट्रैजेक्टरी ऑप्टिमाइजेशन, GPS जैमिंग और पैट्रियट से बचाव) ईरान को ट्रांसफर की है। इससे ईरानी मिसाइलें पैट्रियट इंटरसेप्टर्स से बचकर लक्ष्य तक पहुंच रही हैं – कई हमलों में 15 पैट्रियट मिसाइलें भी एक ईरानी मिसाइल को नहीं रोक पाईं।
- हथियार सप्लाई: ईरान ने रूस से Verba MANPADS (मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस) और अन्य एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम खरीदे हैं। रूस ईरान को GPS जैमिंग टेक्नोलॉजी भी दे रहा है, जो अमेरिकी ड्रोन और प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों को कन्फ्यूज करती है।
- बदले का खेल: यूक्रेन युद्ध में ईरान ने रूस को शाहेद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दीं। अब रूस बदले में ईरान को इंटेल और तकनीक दे रहा है – यह रूस-ईरान की गहरी सैन्य साझेदारी का सबूत है।
अमेरिकी और इजरायली रिएक्शन
अमेरिकी अधिकारियों ने इसे “मॉस्को का इंडायरेक्ट इन्वॉल्वमेंट” बताया है। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, तीन अमेरिकी इंटेलिजेंस अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि रूस ईरान को अमेरिकी वारशिप्स, एयरक्राफ्ट और बेस की लोकेशन दे रहा है। CNN और AP ने भी रिपोर्ट किया कि रूस की मदद से ईरानी हमले ज्यादा प्रभावी हो रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन ने रूस पर “अमेरिकी फोर्सेस पर अटैक में मदद” का आरोप लगाया है, लेकिन मॉस्को ने इनकार किया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि “यह पश्चिमी प्रोपगैंडा है”।
मिडिल ईस्ट युद्ध पर असर
यह खुलासा युद्ध को वैश्विक स्तर पर फैलने का खतरा बढ़ा रहा है। ईरान ने हाल के दिनों में अमेरिकी बेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिनमें कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, रडार और राडोम्स को निशाना बनाया गया। सैटेलाइट इमेजरी (Planet Labs, Maxar) से कतर, बहरीन, जॉर्डन और UAE में डैमेज दिख रहा है।
रूस की भूमिका से अमेरिका-रूस टेंशन और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस की मदद जारी रही, तो युद्ध में NATO या अन्य देश शामिल हो सकते हैं।
यह खुलासा मिडिल ईस्ट की जंग को और खतरनाक बना रहा है। रूस की छिपी भूमिका अब साफ हो चुकी है – क्या यह युद्ध को विश्व युद्ध की ओर ले जाएगा? स्थिति पर नजर रखी जा रही है।






