राजधानी के सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय में लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत खोल दी। अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए आने पर न डॉक्टर मिल रहे हैं, न समय पर उपचार। खासकर इमरजेंसी टाइम में स्थिति इतनी खराब है कि मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। शुक्रवार को अस्पताल में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली जब कई गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी के लिए दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
ओपीडी खत्म होने के बाद इमरजेंसी विभाग में डॉक्टरों की अनुपलब्धता आम बात बन चुकी है। स्टाफ की कमी और लापरवाही के कारण कई बार ऑपरेशन तक टल जाते हैं। यही हाल शुक्रवार को भी रहा, जब इमरजेंसी में भर्ती दो गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन सिर्फ इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि सोनोग्राफी करने वाला डॉक्टर “लंच पर गया था”।
अस्पताल में मौजूद मरीजों के परिजनों ने बताया कि दो महिलाएं तो ऐसी थीं जिनका ऑपरेशन होना था, लेकिन सोनोग्राफी रूम में डॉक्टर के न आने से वे टेबल पर ही लेटी इंतजार करती रहीं। नर्सिंग स्टाफ ने भी कोई ठोस जवाब नहीं दिया। पूछने पर बस इतना कहा गया कि डॉक्टर लंच पर गए हैं और कुछ देर में लौट आएंगे। मगर यह “कुछ देर” दो घंटे में बदल गया।
शबनम बानो (24) के परिजन ने बताया, “शबनम को दोपहर करीब 12 बजे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी और करीब ढाई बजे ऑपरेशन थिएटर से सोनोग्राफी के लिए भेज दिया। लेकिन शाम साढ़े चार बजे तक कोई डॉक्टर नहीं आया। स्टाफ ने कहा कि सोनोग्राफी करने वाला डॉक्टर लंच पर है। ऐसे में मेरी बहन टेबल पर लेटी रही, दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
इसी तरह गर्भवती शाइस्ता (39) ने बताया, “डॉक्टरों ने कहा था कि मेरी स्थिति गंभीर है और तुरंत सोनोग्राफी करवानी जरूरी है ताकि ऑपरेशन किया जा सके। लेकिन जब सोनोग्राफी रूम पहुंची तो पता चला कि डॉक्टर नहीं हैं। मैं डेढ़ घंटे से ज्यादा इंतजार करती रही। अगर ऑपरेशन अर्जेंट है तो डॉक्टर लंच टाइम में कैसे जा सकता है?”
पुष्पा रानी (38) के परिजन ने भी यही शिकायत दोहराई। उन्होंने बताया, “हम इमरजेंसी में लेकर आए तो डॉक्टरों ने सोनोग्राफी की सलाह दी। बोले कि रिपोर्ट के बाद ही आगे का इलाज होगा। लेकिन यहां पहुंचने पर पता चला कि डॉक्टर पिछले एक घंटे से नहीं है। स्टाफ कहता रहा – बस आते ही होंगे। लेकिन मरीज दर्द में तड़पती रही और किसी को परवाह नहीं।”
अस्पताल के अंदर मौजूद अन्य मरीजों ने भी बताया कि इमरजेंसी समय में डॉक्टरों का गायब रहना आम बात है। कई बार रात में स्टाफ भी गायब मिलता है। सवाल यह उठता है कि जिस अस्पताल में हर दिन सैकड़ों गर्भवती महिलाएं पहुंचती हैं, वहां अगर डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं होंगे तो इलाज कैसे होगा?
अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी है और कई डॉक्टरों की ड्यूटी एक साथ दो-दो विभागों में लगाई जाती है। ऐसे में समय पर मरीजों को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जयपुर जैसे बड़े शहर में महिला अस्पताल की यह लापरवाही यह दिखाती है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत कितनी खराब है। मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली यह लापरवाही अगर यूं ही जारी रही तो आने वाले दिनों में कोई बड़ा हादसा होना तय है। फिलहाल सवाल यही है — “क्या लंच टाइम मरीजों की जान से ज्यादा जरूरी है?”






