नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते 25-26 फरवरी को इजरायल के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं। यह उनका 2017 के ऐतिहासिक दौरे के बाद इजरायल का दूसरा दौरा होगा, जो भारत-इजरायल के बीच रणनीतिक और रक्षा संबंधों को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। इस दौरे से पहले भारत की रक्षा तैयारियों की बड़ी तस्वीर साफ हो रही है, जहां S-400 जैसे रूसी एयर डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ इजरायली अत्याधुनिक मिसाइल, लेजर-आधारित और स्टैंड-ऑफ रक्षा प्रणालियों को शामिल करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ रहे हैं।
दौरे का मुख्य एजेंडा पीएम मोदी का दौरा तेल अवीव में होगा, जहां वे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। चर्चा का केंद्र व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षेत्रीय सहयोग रहेगा। पीएम मोदी इजरायल की संसद (Knesset) को संबोधित भी करेंगे। नेतन्याहू ने हाल ही में एक सैन्य समारोह में कहा था, “अगले हफ्ते मेरे करीबी दोस्त नरेंद्र मोदी इजरायल आएंगे। भारत एक विशाल वैश्विक शक्ति है, और हम सभी क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करेंगे।”
रक्षा सहयोग में नई ऊंचाई भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत है, जिसकी अनुमानित कीमत आने वाले वर्षों में करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। दौरे के दौरान कोई नई बड़ी डिफेंस डील पर हस्ताक्षर नहीं होने की संभावना है, क्योंकि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग एक सतत प्रक्रिया है। हालांकि, सुरक्षा सहयोग पर एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर तय माना जा रहा है।
इससे पहले फरवरी 2026 में ही इजरायल के रक्षा मंत्रालय (IMOD) की इंटरनेशनल डिफेंस कोऑपरेशन डायरेक्टोरेट (SIBAT) और इंडियन सोसाइटी ऑफ डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के बीच एक MoU साइन हुआ था, जो संयुक्त सेमिनार, B2B मीटिंग्स और सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है।
फोकस एरिया: एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल, लेजर और स्टैंड-ऑफ सिस्टम
- एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस: भारत अपनी ‘मिशन सुधर्शन’ के तहत लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा के लिए इजरायल के साथ संयुक्त विकास पर जोर दे रहा है। इजरायल के आइरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो सिस्टम जैसे अनुभव से फायदा मिल सकता है।
- लेजर-आधारित डिफेंस: इजरायल की हाई-एनर्जी लेजर तकनीक (जैसे Iron Beam) को भारत में शामिल करने की संभावना, जो ड्रोन स्वार्म्स, रॉकेट्स और मोर्टार को नष्ट करने में सक्षम है।
- लॉन्ग-रेंज स्टैंड-ऑफ मिसाइल्स और ड्रोन: भूमि, समुद्र और हवाई प्लेटफॉर्म से लॉन्च होने वाली उन्नत मिसाइलें और ड्रोन पर सहयोग।
ये तकनीकें भारत को ड्रोन, हवाई हमलों और बैलिस्टिक मिसाइलों से पूरी तरह सुरक्षित बनाने में मदद करेंगी। दोनों देश आतंकवाद विरोध में एक ही पृष्ठ पर हैं और राजनीतिक मुद्दों पर एकजुट हैं।






