हिमाचल प्रदेश में सरकार खर्च कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu जल्द ही मंत्री और विधायकों के वेतन में कटौती से जुड़ा प्रस्ताव कैबिनेट में ला सकते हैं। बताया जा रहा है कि राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार यह सख्त फैसला लेने पर विचार कर रही है।
सूत्रों के अनुसार सरकार पहले ही कई विभागों में खर्च कम करने के निर्देश दे चुकी है। अब जनप्रतिनिधियों के वेतन और भत्तों में कमी करने का विकल्प भी गंभीरता से देखा जा रहा है। हाल ही में कुछ पदों से कैबिनेट रैंक हटाने के बाद सरकार पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दबाव बढ़ा है। ऐसे में मंत्री और विधायकों की सैलरी में कटौती का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि राज्य पर बढ़ते कर्ज और सीमित आय के कारण वित्तीय संतुलन बनाए रखना चुनौती बन गया है। इसी कारण सरकार अनावश्यक खर्चों को कम करने की नीति पर काम कर रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इसका असर मंत्रियों, विधायकों और कुछ अन्य पदों पर मिलने वाली सुविधाओं पर भी पड़ सकता है।
राजनीतिक हलकों में इस संभावित फैसले को बड़ा कदम माना जा रहा है। कुछ लोग इसे आर्थिक सुधार की दिशा में जरूरी बता रहे हैं, जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार को पहले प्रशासनिक खर्चों पर नियंत्रण करना चाहिए। हालांकि अभी तक इस संबंध में आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाली कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है।
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu पहले भी कह चुके हैं कि राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए जरूरी फैसले लेने से पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में मंत्री और विधायकों के वेतन में कटौती का प्रस्ताव आने की संभावना को गंभीर माना जा रहा है।
यदि यह प्रस्ताव पास होता है तो हिमाचल प्रदेश उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहाँ वित्तीय अनुशासन के लिए जनप्रतिनिधियों के वेतन में कटौती जैसा कदम उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे खर्च कम होगा और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।






