नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह रास्ता पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे रोकने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री ने नागरिक इलाकों और ऊर्जा ठिकानों पर हो रहे हमलों पर भी चिंता जताई और कहा कि ऐसे कदम क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थक है और किसी भी तरह की हिंसा का विरोध करता है।
सरकार के अनुसार भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 41 देशों से तेल और गैस का आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने या समुद्री रास्ते बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी वजह से भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह मुद्दा उठाया है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखा जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का परिवहन होता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है तो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया, यूरोप और कई अन्य देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में सभी देशों को संयम बरतना चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पूरी तरह सतर्क है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार रखी जा रही है, ताकि देश में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित न हो। फिलहाल भारत की नजर पश्चिम एशिया के हालात पर बनी हुई है और सरकार हर संभावित स्थिति के लिए तैयार रहने की रणनीति पर काम कर रही है।







