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March 22, 2026 11:51 pm

वायरल हो रही तस्वीरें: बांसवाड़ा में आधी रात दो लड़कों का विवाह, पूरा गांव बना गवाह

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यह वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के बड़ोदिया गांव की सदियों पुरानी अनोखी परंपरा को दिखाते हैं। यहां हर साल होली की पूर्व संध्या (फागुन मास की अमावस्या या होली से एक दिन पहले) आधी रात को दो छोटे बालकों (आमतौर पर 8-14 साल के अविवाहित लड़के) का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है। यह कोई वास्तविक शादी नहीं, बल्कि एक रस्म है जो गांव की मान्यताओं के अनुसार निभाई जाती है।

परंपरा की मुख्य बातें:

  • उत्पत्ति और मान्यता: यह परंपरा 500-600 साल पुरानी बताई जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि ‘खेर’ जाति के किसी श्राप से गांव की रक्षा के लिए यह रस्म जरूरी है। यदि न निभाई जाए तो गांव पर संकट आ सकता है। कुछ जगहों पर इसे वंश वृद्धि, संतान की चिरायु और गांव की खुशहाली-समृद्धि से जोड़ा जाता है।
  • कैसे होती है प्रक्रिया:
    • गांव के युवा (स्थानीय भाषा में ‘गेरिये’ कहलाते हैं) आधी रात (लगभग 1 बजे) सोते हुए दो लड़कों को उनके घरों से उठाकर लाते हैं।
    • दोनों को लक्ष्मीनारायण मंदिर या मंडप में ले जाया जाता है।
    • एक को दूल्हा (पगड़ी, पेंट-शर्ट, तलवार आदि पहनाकर) और दूसरे को दुल्हन (साड़ी, मंगलसूत्र, सिंदूर आदि) बनाया जाता है।
    • वैदिक मंत्रों के साथ वरमाला, सिंदूर दान, मंगलसूत्र, सात फेरे और अन्य रस्में पूरी की जाती हैं।
    • पूरा गांव, पंच और बुजुर्ग गवाह बनते हैं। उत्साह में ढोल-नगाड़े, फाग गीत और नाच-गाना होता है।
  • 2025-2026 की घटना: हाल की खबरों में चुन्नू और मुन्नू नाम के दो बालकों का विवाह वायरल हुआ। दोनों दूल्हा बनने की जिद पर अड़े थे, लेकिन मुखिया नाथजी भाई पटेल और डॉ. स्वामी विवेकानंद महाराज के हस्तक्षेप से चुन्नू दूल्हा और मुन्नू दुल्हन बने। हवन में तंबाकू जलाकर नशा मुक्ति का संदेश भी दिया गया।

यह परंपरा राजस्थान की आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति की विविधता को दर्शाती है, जहां आस्था, भय और सामुदायिक एकता का मिश्रण देखने को मिलता है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “गजब की रस्म”, “अनोखी परंपरा” कहकर शेयर कर रहे हैं—कुछ इसे रोचक मानते हैं, तो कुछ आधुनिक नजरिए से हैरान।

यहां कुछ वायरल तस्वीरें हैं जो इस अनोखे विवाह की झलक दिखाती हैं:

ये तस्वीरें विभिन्न वर्षों की हैं, लेकिन परंपरा हर साल लगभग इसी तरह निभाई जाती है। पूरा गांव इसमें शामिल होकर इसे उत्सव की तरह मनाता है!

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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