उत्तराखंड में दोहरी पेंशन घोटाले पर सीएम धामी की सख्ती: 1377 अपात्र पेंशनर्स के खिलाफ कार्रवाई को मंजूरी, वसूली और मुकदमे के निर्देश
देहरादून, 23 फरवरी 2026: उत्तराखंड में सरकारी खजाने पर दोहरी पेंशन का फर्जीवाड़ा करने वालों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य में 1377 ऐसे रिटायर्ड कर्मचारी पाए गए हैं, जो अपने विभाग से सेवानिवृत्ति पेंशन के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग की वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन जैसी योजनाओं का भी लाभ उठा रहे थे। मुख्यमंत्री ने इन अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ सत्यापन, पेंशन रोकने, गलत तरीके से ली गई राशि की वसूली और विधिक कार्रवाई की मंजूरी दे दी है।
मामला तब सामने आया जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य के पेंशन धारकों के रिकॉर्ड की क्रॉस-वेरिफिकेशन और डेटा एनालिसिस की। जांच में खुलासा हुआ कि 1300 से अधिक (बाद में सटीक आंकड़ा 1377) रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी समाज कल्याण विभाग की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अनुचित लाभ ले रहे थे। CAG ने मुख्य सचिव और वित्त सचिव को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
इसके बाद समाज कल्याण विभाग के निदेशक ने सभी जिलों में जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि ये 1377 पेंशनर्स एक तरफ विभागीय रिटायरमेंट पेंशन ले रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वृद्धावस्था, विधवा या दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं का फायदा भी उठा रहे थे – जो नियमों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं:
- अपात्र लाभार्थियों की पेंशन तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए।
- गलत तरीके से प्राप्त राशि की वसूली की जाए।
- दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई (मुकदमा) शुरू की जाए।
- हर स्तर पर उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाए।
- सभी जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
सीएम धामी ने कहा कि ऐसे फर्जीवाड़े से जरूरतमंद व असल पात्र लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं। राज्य सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। CAG रिपोर्ट के बाद पहले ही कई मामलों में पेंशन रोक दी गई थी, अब व्यापक स्तर पर कार्रवाई हो रही है।






