पटना, 21 फरवरी 2026: पटना हाईकोर्ट ने बिहार विधानसभा के कुल 42 विधायकों (सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इन विधायकों पर 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान वोट चोरी (मतदान में अनियमितता), मत खरीदने और चुनावी हलफनामे (एफिडेविट) में संपत्ति, आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य जानकारी छिपाने/गलत बताने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस फैसले से बिहार की सियासत में भूचाल आ गया है, क्योंकि इसमें विधानसभा स्पीकर, मंत्री और प्रमुख नेता शामिल हैं।
मामला क्या है?
- 19 फरवरी 2026 को पटना हाईकोर्ट में प्रारंभिक सुनवाई हुई।
- चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों (मुख्य रूप से महागठबंधन से) ने जीतने वाले विधायकों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं।
- याचिकाओं में आरोप:
- चुनाव के दौरान मतदाताओं को 10-10 हजार रुपये देकर वोट खरीदना।
- मतगणना में धांधली और वोट चोरी।
- नामांकन के समय दाखिल फॉर्म 26 (चुनावी हलफनामा) में संपत्ति, गाड़ियां, बैंक बैलेंस, पेंडिंग क्रिमिनल केस या सजा की जानकारी छिपाई या कम करके दिखाई गई।
- कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी किया और निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
- अगली सुनवाई में विधायकों के जवाब, साक्ष्य और EC की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अगर आरोप साबित हुए तो सदस्यता रद्द हो सकती है।
प्रमुख नाम जिन्हें नोटिस मिला:
- विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार (BJP, गया सीट)।
- ऊर्जा एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव (JDU)।
- बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा (पूर्व मंत्री)।
- JDU विधायक चेतन आनंद।
- RJD विधायक अमरेंद्र प्रसाद (गोह सीट)।
- अन्य: NDA से करीब 32 और महागठबंधन से 8-10 विधायक शामिल।
चुनाव परिणाम का बैकग्राउंड (14 नवंबर 2025 को घोषित):
- NDA की भारी जीत: कुल 243 सीटों में 202 सीटें जीतीं।
- BJP: 89 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)।
- JDU: 85 सीटें।
- LJP (रामविलास): 19 सीटें।
- HAM: 5 सीटें।
- RLM: 4 सीटें।
- महागठबंधन: सिर्फ 35-40 सीटें।
- RJD: 25 सीटें।
- कांग्रेस: 6 सीटें।
- अन्य: CPIML आदि।
- नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
- विपक्ष (RJD/CPIML): इसे “लोकतंत्र की जीत” बताया, कहा कि हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों पर संज्ञान लिया। CPI-ML विधायक अजय सिंह ने कहा, “सभी विधायकों को कोर्ट में जवाब देना होगा, कोई पद विशेषाधिकार नहीं देता।”
- NDA: मामला अदालत में है, विधायक जवाब देंगे। कुछ ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया।
- विधानसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा हुआ, जहां सत्ता और विपक्ष ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए।
यह मामला बिहार की राजनीति में बड़ा ट्विस्ट है, क्योंकि अगर कई विधायकों की सदस्यता रद्द हुई तो विधानसभा की ताकत बदल सकती है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है।






