पिंक स्टार हॉस्पिटल, जयपुर में 63 वर्षीय राजा देवी (निवासी दूदू) के ब्रेन एन्यूरिज्म के जटिल मामले पर पूरी चर्चा और विस्तृत जानकारी हिंदी में:
घटना का विवरण
राजा देवी को अचानक बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था। परिवार वाले बहुत घबराए हुए थे क्योंकि उनकी हालत बेहद नाजुक थी। पिंक स्टार हॉस्पिटल की इमरजेंसी टीम ने तुरंत उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया और जरूरी जांचें शुरू कीं।
जांच रिपोर्ट क्या बताती है?
सीटी स्कैन, एमआरआई और सेरेब्रल एंजियोग्राफी जैसी उन्नत जांचों से पता चला कि राजा देवी के ब्रेन की प्रमुख रक्त वाहिका (Internal Carotid Artery – ICA) में एक बड़ा एन्यूरिज्म (रक्तनली की दीवार में कमजोरी से बना गुब्बारा जैसा उभार) फट गया था। इस फटने से सबअराक्नॉइड हेमरेज (मस्तिष्क के चारों ओर खून भर जाना) हो गया था, जो ब्रेन एन्यूरिज्म का सबसे खतरनाक रूप है।
- यह स्थिति जानलेवा मानी जाती है।
- बिना समय पर इलाज के 30-40% मरीज पहले 24-48 घंटों में ही दम तोड़ देते हैं।
- बचे मरीजों में भी अक्सर पक्षाघात, कोमा या स्थायी ब्रेन डैमेज हो जाता है।
इलाज कैसे हुआ?
पिंक स्टार हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. राजवेंद्र सिंह चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सर्जरी का फैसला किया। टीम ने निम्नलिखित कदम उठाए:
- तत्काल स्थिरीकरण — ब्लड प्रेशर कंट्रोल, दर्द निवारक, एंटी-कन्वल्सेंट दवाएं और वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया।
- विस्तृत इमेजिंग — 3D एंजियोग्राफी से एन्यूरिज्म का सटीक आकार, लोकेशन और आसपास की रक्त वाहिकाओं का नक्शा तैयार किया।
- सर्जरी — ओपन क्रेनियोटॉमी के जरिए एन्यूरिज्म क्लिपिंग की गई। इसमें माइक्रोस्कोप और एडवांस न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर एन्यूरिज्म के गले पर विशेष टाइटेनियम क्लिप लगाई गई, ताकि आगे खून न निकले।
- कुछ मामलों में कोइलिंग (एंडोवैस्कुलर) भी विकल्प होता है, लेकिन इस केस में लोकेशन और फटने की वजह से क्लिपिंग ज्यादा सुरक्षित समझी गई।
- पोस्ट-ऑपरेटिव केयर — आईसीयू में 5-7 दिनों तक निगरानी, हाइड्रोसेफलस से बचाव के लिए ईवीडी (External Ventricular Drain) अगर जरूरी हो, और फिर सामान्य वार्ड में शिफ्ट।
सर्जरी के बाद की स्थिति
सर्जरी सफल रही। राजा देवी अब पूरी तरह होश में हैं।
- वे बात कर रही हैं, परिवार को पहचान रही हैं।
- हाथ-पैरों में मूवमेंट वापस आ गया है।
- सिरदर्द और उल्टी जैसी शिकायतें लगभग खत्म हो गई हैं।
- रिकवरी तेजी से हो रही है और जल्द ही डिस्चार्ज होने की उम्मीद है।
परिवार की प्रतिक्रिया
परिवार के सदस्यों ने अस्पताल स्टाफ और खासकर डॉ. राजवेंद्र सिंह चौधरी का दिल से शुक्रिया अदा किया। एक सदस्य ने कहा: “हमारे पास उम्मीद खत्म हो रही थी, लेकिन पिंक स्टार हॉस्पिटल की टीम ने चमत्कार कर दिया। आधुनिक मशीनें, अनुभवी डॉक्टर और 24 घंटे देखभाल के कारण ही मां को नया जीवन मिला।”
ब्रेन एन्यूरिज्म के बारे में जरूरी बातें
- ज्यादातर एन्यूरिज्म बिना लक्षण के रहते हैं, लेकिन फटने पर अचानक सिरदर्द (जिसे “थंडरक्लैप हेडएके” कहते हैं), उल्टी, बेहोशी आ जाती है।
- जोखिम कारक: हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, उम्र (50+), परिवार में इतिहास।
- समय पर अस्पताल पहुंचना और विशेष न्यूरोसर्जरी सेंटर में इलाज ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।
पिंक स्टार हॉस्पिटल (मानसरोवर एक्सटेंशन, जयपुर) ब्रेन, स्पाइन और न्यूरो से जुड़े जटिल मामलों में तेजी से नाम कमा रहा है। यह सफलता उनके न्यूरोसाइंस विभाग की बढ़ती क्षमता को दिखाती है।






