लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: विपक्ष की गलती पर मिला सुधार का मौका, बड़ा राजनीतिक संदेश
नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने आखिरकार अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। यह कदम राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रहा है, लेकिन प्रस्ताव में तकनीकी कमियां होने के कारण इसे तुरंत खारिज किया जा सकता था। हालांकि, स्पीकर ओम बिरला ने नियमों का पालन करते हुए विपक्ष को नोटिस में सुधार करने का अवसर देकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों द्वारा मंगलवार (11 फरवरी 2026) को दिए गए नोटिस में कई खामियां पाई गईं।
अविश्वास प्रस्ताव में क्या थीं गलतियां?
सूत्रों ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में फरवरी 2025 की घटनाओं का चार बार उल्लेख किया गया है। लोकसभा के नियमों के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव केवल मौजूदा सत्र या हालिया घटनाओं पर आधारित होना चाहिए। पुरानी घटनाओं का जिक्र इसे अमान्य बना देता है। इस आधार पर नोटिस को प्रारंभिक जांच में ही रद्द किया जा सकता था। विपक्षी दलों, मुख्य रूप से कांग्रेस और अन्य गठबंधन पार्टियों के सांसदों ने इस नोटिस को तैयार किया था, लेकिन इसमें नियमों की अनदेखी स्पष्ट थी।
इसके बावजूद, स्पीकर ओम बिरला ने सख्ती दिखाने के बजाय लोकतांत्रिक भावना का सम्मान किया। उन्होंने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिए कि विपक्षी सांसदों से संपर्क कर नोटिस में आवश्यक संशोधन करवाए जाएं। संशोधित नोटिस प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। यह फैसला विपक्ष को अपनी गलती सुधारने का मौका देता है और संसदीय प्रक्रिया की मजबूती को दर्शाता है।
ओम बिरला ने दिए ये निर्देश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पूरे मामले को नियमों के दायरे में रखते हुए त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक:
- संशोधित नोटिस प्राप्त होने पर उसका तत्काल परीक्षण किया जाएगा।
- यदि नोटिस नियमों के अनुरूप पाया गया, तो इसे बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद सदन की कार्यसूची में शामिल किया जाएगा।
- बजट सत्र का दूसरा चरण 17 फरवरी 2026 से शुरू होने वाला है, इसलिए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा उस समय ही संभव होगी।
ओम बिरला का यह कदम संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने के आरोपों का जवाब भी माना जा रहा है। विपक्षी नेता राहुल गांधी और अन्य सांसदों ने पहले स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया था, लेकिन इस फैसले से बिरला ने अपनी निष्पक्षता साबित करने की कोशिश की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विपक्षी दलों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। कांग्रेस सांसदों ने कहा, “यह प्रस्ताव संसद की गरिमा बचाने के लिए जरूरी है।” वहीं, भाजपा ने इसे विपक्ष की हताशा करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए पुरानी घटनाओं पर आधारित प्रस्ताव लाकर खुद की फजीहत करा रहे हैं।”
आगे क्या?
अब सबकी नजरें संशोधित नोटिस पर हैं। यदि विपक्ष सुधार कर नोटिस जमा करता है, तो सदन में बहस हो सकती है। लोकसभा में भाजपा गठबंधन का बहुमत होने से प्रस्ताव के पास होने की संभावना कम है, लेकिन यह राजनीतिक बहस का मुद्दा जरूर बनेगा। संसदीय विशेषज्ञों का कहना है कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दुर्लभ होता है और आखिरी बार 2003 में ऐसा हुआ था।






