नेपाल की प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में आज एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण देखने को मिला। संघीय संसद सचिवालय के अनुसार, 47 नवनिर्वाचित सांसदों ने नेपाली भाषा के अलावा अपनी मातृभाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इन सांसदों ने कुल 17 विभिन्न भाषाओं में शपथ ग्रहण की, जिससे सिंहदरबार की नई संसद भवन की दीवारें बहुभाषी गूंज से भर उठीं।
यह घटना नेपाल के बहुलतावादी लोकतंत्र की जीवंत मिसाल बन गई है। फाल्गुन 21 (5 मार्च 2026) को हुए आम चुनाव के बाद नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण आज चैत्र 12 (26 मार्च 2026) को दोपहर 2 बजे नई संसद भवन के मल्टीपरपज हॉल में हुआ। शपथ ग्रहण की प्रक्रिया ज्येष्ठ सदस्य नेपाली कांग्रेस के 78 वर्षीय नेता अर्जुन नरसिंह केसी ने संचालित की। उन्होंने पहले खुद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से शपथ ली और फिर अन्य सांसदों को शपथ दिलाई।
17 भाषाओं में शपथ – विविधता का उत्सव
संसद सचिवालय के अनुसार, 47 सांसदों ने नेपाली के अलावा अपनी मातृभाषा चुनकर शपथ ली। इनमें शामिल प्रमुख भाषाएं हैं:
- मैथिली और नेपाल भाषा (नेवारी) – सबसे अधिक (6-6 सांसद)
- डोटेली, थारू, तामांग, बान्तावा
- संस्कृत – राप्रपा की सांसद खुश्बु ओली ने संस्कृत में शपथ ली
- भोजपुरी, मगही, अवधी आदि
श्रम संस्कृति पार्टी (SSP) के 7 सांसदों ने चार अलग-अलग भाषाओं में शपथ ली। कई सांसदों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाले पारंपरिक वस्त्र पहनकर शपथ ग्रहण की, जो कानून के अनुसार अनुमत है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और अन्य गण्यमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में यह समारोह बेहद भव्य रहा। सांसदों ने शपथ लेते समय अपनी भाषा में बोलकर नेपाल की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान दिया। एक सांसद ने मैथिली में शपथ लेते हुए कहा कि “यह केवल शपथ नहीं, बल्कि मेरी मातृभूमि और भाषा के प्रति समर्पण है।”
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटना?
नेपाल की संविधान और शपथ अधिनियम 2022 में स्पष्ट प्रावधान है कि सांसद अपनी मातृभाषा में शपथ ले सकते हैं, बशर्ते उन्होंने तीन दिन पहले प्रमाणित अनुवाद संसद सचिवालय को सौंप दिया हो। इस बार 47 सांसदों ने इस अधिकार का इस्तेमाल किया, जो पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक संख्या है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम नेपाल के संघीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा। देश में दर्जनों भाषाएं और सैकड़ों जातीय समूह हैं। मातृभाषा में शपथ देकर सांसदों ने संदेश दिया कि संसद केवल काठमांडू केंद्रित नहीं, बल्कि पूरे नेपाल की विविधता का प्रतिनिधित्व करती है।
सांसदों और नेताओं की प्रतिक्रिया
- अर्जुन नरसिंह केसी (ज्येष्ठ सदस्य): “यह दिन नेपाल के लोकतंत्र के लिए गौरवपूर्ण है। हर भाषा और संस्कृति का सम्मान ही सच्चा समावेशी लोकतंत्र है।”
- खुश्बु ओली (राप्रपा): संस्कृत में शपथ लेने के बाद उन्होंने कहा कि प्राचीन भाषा को आधुनिक संसद में जगह मिलना गर्व की बात है।
- कई मधेशी और जनजातीय सांसदों ने अपनी भाषा में बोलकर भावुक हो गए। एक थारू सांसद ने कहा, “आज मेरी मां की भाषा संसद में गूंजी, यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है।”
आगे क्या?
शपथ ग्रहण के बाद संसद की पहली बैठक जल्द ही शुरू होने वाली है। इसमें सभामुख का चुनाव, प्रधानमंत्री चयन और नई सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस बीच, भाषाई विविधता का यह उदाहरण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।
नेपाल जैसे छोटे लेकिन सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध देश में 17 भाषाओं में शपथ ग्रहण करना न केवल प्रतीकात्मक है, बल्कि लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक ले जाने का एक ठोस कदम है।
नेपाल में लोकतंत्र सचमुच नया रंग ले रहा है – जहां हर आवाज, हर भाषा और हर पहचान को बराबर का सम्मान मिल रहा है।
यह ऐतिहासिक क्षण उन लाखों नागरिकों को प्रेरणा देगा जो अपनी मातृभाषा को बचाए रखने और सम्मानित करने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
शुभकामनाएं: सभी 47 सांसदों को शपथ ग्रहण की बधाई! उम्मीद है कि वे सदन में अपनी भाषा और संस्कृति के साथ-साथ पूरे राष्ट्र की सेवा करेंगे।
अगर आप इस खबर को और विस्तार से जानना चाहें, किसी खास सांसद की भाषा या नाम की डिटेल चाहिए, या इस पर कोई और आर्टिकल चाहिए, तो बताएं। नेपाल की राजनीति में यह वाकई एक यादगार दिन है!







