दिल्ली में फिर बढ़ा प्रदुषण, केंद्र ने प्रदूषण को लेकर केजरीवाल सरकार को भेजा नोटिस

 
दिल्ली में फिर बढ़ा प्रदुषण, केंद्र ने प्रदूषण को लेकर केजरीवाल सरकार को भेजा नोटिस


नई दिल्ली। वायु प्रदूषण के लिहाज से राजधानी दिल्ली में अगस्त का महीना काफी अच्छा रहा, जबकि नवंबर बेहद खराब रहा। नवंबर में वाहनों से निकलने वाना धुआं, औद्योगिक इकाइयों एवं पराली के कारण होने वाला प्रदूषण संयुक्त रूप से राजधानी वासियों के लिए जानलेवा बना गया। ऐसे में केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को नोटिस भेजकर प्रदूषण को कम करने के लिए जरूरी उपाय करने के आदेश दिए हैं।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, 'पराली का जलना बंद हो गया है फिर भी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी खराब है। कहीं-कहीं तो हवा की गुणवत्ता की सूचकांक 300 और 400 के ऊपर है।' 

जावड़ेकर ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 50 टीमें रोजाना दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न जगहों पर जाती है और वहां जो शिकायतें मिलती हैं, उन्हें संबंधित एजेंसी तक पहुंचाती है।

जावड़ेकर ने कहा कि उन शिकायतों पर कुछ काम तो होते हैं, लेकिन अधिकांश पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। यह स्थिति की गंभीरता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि आज केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। 

उन्होंने कहा कि नोटिस में कचरा जलाना, कचरे का निष्पादन, भवन निर्माण के नियमों के उल्लंघन, औद्योगिक इलाके में उड़ धूल को लेकर चिंता जाहिर की गई है। साथ ही प्रदूषण के जो भी कारण है उसपर कार्रवाई करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और सभी एजेंसी को हरकत में आना चाहिए। जब पराली जलना बंद हो गया है तो प्रदूषण के अन्य कारणों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों में टायर जलाने को लेकर भी चिंता प्रकट की।

वहीं, पूरे नवंबर में राजधानी के वायु प्रदूषण स्तर पर सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई) ने अध्ययन कर एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट से आंकड़ों के आधार पर कई नई चीजें पता चलती हैं। इस अध्ययन में पाया गया है कि लंबे लॉकडाउन के दौरान वायु प्रदूषण न्यूनतम पर पहुंचा लेकिन नवंबर में जाड़े का मौसम शुरू होते ही इस स्तर को कायम नहीं रखा जा सका। वर्ष भर का सामान्य प्रदूषण नवंबर में गंभीर स्तर तक पहुंच गया। वाहनों, औद्योगिक इकाइयों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल, बिजली उत्पादन संयंत्र और कचरा प्रबंधन पर कठोर नियम बनाकर ही राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जाना संभव है।

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