उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां पर कथित अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले बिहार के मौलाना अब्दुल्लाह सलीम (जिन्हें मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी भी कहा जाता है) की मुश्किलें अब चरम पर पहुंच गई हैं। शुरुआत में धार्मिक सभा में गौ-हत्या कानून और यूपी प्रशासन पर हमला बोलते हुए की गई टिप्पणी अब पूरे यूपी में आग की तरह फैल गई है। बलरामपुर पुलिस ने सबसे पहले FIR दर्ज की, जिसके बाद अब तक 83 से ज्यादा थानों में शिकायतें और FIR दर्ज हो चुकी हैं। हिंदू संगठन, भाजपा कार्यकर्ता और आम जनता सड़कों पर उतर आए हैं – लखनऊ, कानपुर, वाराणसी समेत कई शहरों में पुतला दहन, प्रदर्शन और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
विवाद की शुरुआत और मौलाना का बयान
मामला तब शुरू हुआ जब बिहार में एक धार्मिक जलसे में मौलाना अब्दुल्ला सलीम ने यूपी के गौ-हत्या निषेध कानून की आलोचना करते हुए कथित तौर पर कहा कि “योगी जी की मां का गोश्त खाया जाएगा” और “योगी जी के घुटनों से पैर की उंगलियों तक गोली से छेद कर दिया जाएगा” जैसे शब्द इस्तेमाल किए। यह वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश फैला। कई लोगों ने इसे हिंदू भावनाओं का अपमान और CM के परिवार पर व्यक्तिगत हमला बताया। मौलाना के नाम में “चतुर्वेदी” जोड़ना भी विवाद का विषय बना, क्योंकि यह ब्राह्मण उपनाम है और इसे अपमानजनक माना जा रहा है।
FIR और कानूनी कार्रवाई
- बलरामपुर में सबसे पहले FIR दर्ज हुई (7 मार्च 2026), जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 (अपमान) और 353-2 (सार्वजनिक उपद्रव) लगाई गई।
- अब तक 83+ थानों में तहरीरें दी जा चुकी हैं, और कई जगहों पर 21 लाख रुपये का इनाम घोषित करने की अफवाहें भी वायरल हैं (हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं)।
- यूपी पुलिस और प्रशासन मौलाना की गिरफ्तारी के लिए सक्रिय हैं, और बिहार पुलिस से सहयोग मांगा जा रहा है।
मौलाना का नया ड्रामा: विक्टिम कार्ड और उकसावा
जैसे ही FIR और गिरफ्तारी की खबरें फैलीं, मौलाना अब्दुल्ला सलीम में डर के संकेत दिखने लगे। अब उन्होंने विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया है। एक हालिया जलसे या वीडियो में उन्होंने मुस्लिम युवाओं को संबोधित करते हुए कहा:
- “अगर मैं जेल गया तो सिर्फ व्हाट्सएप और ट्विटर पर पोस्ट मत करते रहना, मैदान में उतर जाना!”
- “मुझे गिरफ्तार किया गया तो सड़कें तुम्हारी हैं, मुसलमान भाइयो उठो और मैदान संभालो!”
- उन्होंने खुद को पीड़ित बताते हुए कहा कि यह “भड़काऊ एजेंडा” है और वे “मुस्लिमों के खिलाफ साजिश” का शिकार हैं।
यह बयान यूपी में और आक्रोश बढ़ा रहा है। हिंदू संगठन जैसे करणी सेना, विश्व हिंदू परिषद आदि इसे “सांप्रदायिक उन्माद फैलाने” की कोशिश बता रहे हैं। कई मुस्लिम नेताओं ने भी मौलाना की निंदा की है, जैसे मौलाना रजवी ने इसे “भड़काऊ एजेंडा” बताया और चेतावनी दी।
यूपी में प्रतिक्रिया और राजनीतिक कोण
- लखनऊ में पुतला दहन, सड़कों पर प्रदर्शन।
- भाजपा और अन्य हिंदू संगठन CM योगी से “तांडव” की मांग कर रहे हैं, यानी सख्त कार्रवाई।
- CM योगी ने अभी तक सीधे कोई बयान नहीं दिया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर एक्शन तेज है।
- विपक्ष इसे “सांप्रदायिक ध्रुवीकरण” बता रहा है, लेकिन आम जनता में गुस्सा चरम पर है।
विशेषज्ञों की राय
नेफ्रोलॉजिस्ट और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां न सिर्फ भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि कानूनी रूप से भी गंभीर अपराध हैं। गिरफ्तारी होने पर मौलाना पर और धाराएं (जैसे धारा 153A – सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ना) लग सकती हैं।
यह विवाद अब यूपी-बिहार की सियासत में गर्माहट ला रहा है। मौलाना सलीम का डर और विक्टिम कार्ड खेलना दिखाता है कि कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश में वे और गहराई में जा रहे हैं। स्थिति पर नजर रखी जा रही है – क्या गिरफ्तारी होगी या और बड़ा बवाल? अपडेट्स के लिए बने रहें।






