न्यूज़ (समाचार):
कर्नाटक में कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर कई कांग्रेस विधायक दिल्ली हाईकमान के पास जाने की तैयारी में थे। वे आलाकमान से मिलकर सिद्धारमैया की जगह शिवकुमार को CM बनाने का दबाव बनाना चाहते थे।
लेकिन ऐन वक्त पर डीके शिवकुमार ने खुद इन विधायकों को रोक दिया। शुक्रवार को उन्होंने विधायकों से अपील की कि वे उनके नाम पर दिल्ली न जाएं। शिवकुमार ने कहा कि पार्टी आलाकमान से इस मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी है और वे अनुशासन बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।
यह घटना कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया-शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान को और उजागर करती है। हाल ही में बेंगलुरु में 30 विधायकों की एक बैठक भी हुई थी, जहां जन्मदिन पार्टी के बहाने शिवकुमार समर्थकों ने रणनीति पर मंथन किया था।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार नहीं चाहते कि उनकी तरफ से कोई अनियंत्रित कदम उठे, जिससे हाईकमान नाराज हो। फिलहाल स्थिति पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि दिल्ली से क्या फैसला आता है
विस्तृत विवरण (समाचार):
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के अंदर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच CM पद को लेकर तनाव चरम पर है। हाल ही में (फरवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में) शिवकुमार के समर्थक कई विधायकों ने दिल्ली कांग्रेस हाईकमान के पास जाने की तैयारी की थी। उनका मकसद था कि वे आलाकमान से मिलकर सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का दबाव बनाएं।
यह सब तब शुरू हुआ जब बेंगलुरु में एक निजी होटल और बाद में पैलेस ग्राउंड्स में शिवकुमार समर्थक विधायकों (करीब 30-40) की बैठक हुई, जिसे MLA एचसी बालकृष्ण के जन्मदिन पार्टी के बहाने आयोजित किया गया था। बैठक में सत्ता परिवर्तन और दिल्ली में लॉबिंग की रणनीति पर चर्चा हुई।
लेकिन ऐन वक्त पर डीके शिवकुमार ने खुद इन विधायकों को रोक दिया। शुक्रवार (27-28 फरवरी 2026 के आसपास) को उन्होंने मीडिया से साफ कहा:
- “मेरे नाम पर दिल्ली जाने की कोई जरूरत नहीं है।”
- “मैं अपील करता हूं कि कोई भी मेरे लिए लॉबिंग करने दिल्ली न जाए।”
- “अगर किसी के पास व्यक्तिगत अनुरोध हैं या कैबिनेट में जगह की इच्छा है, तो जा सकते हैं, लेकिन मेरे लिए नहीं।”
- “यह कोई ताकत दिखाने की बात नहीं है। विधायक दिल्ली जाते हैं, विदेश जाते हैं, डिनर पार्टियों में शामिल होते हैं – ये व्यक्तिगत मामले हैं, पार्टी से जुड़े नहीं।”
शिवकुमार ने जोर दिया कि पार्टी अनुशासन बनाए रखें और हाईकमान पर फैसला छोड़ दें। उन्होंने यह भी कहा कि वे पार्टी अध्यक्ष के तौर पर हाईकमान को जानकारी देते रहते हैं, लेकिन कोई अनियंत्रित कदम नहीं चाहते।
यह कदम शिवकुमार की रणनीति को दिखाता है – वे चाहते हैं कि CM बनने का फैसला हाईकमान खुद ले, न कि उनके समर्थकों की ओर से कोई दबाव या विवाद पैदा हो।
पृष्ठभूमि:
- कांग्रेस में पहले से 50-50 फॉर्मूला (सिद्धारमैया 2.5 साल, फिर शिवकुमार) की चर्चा है, लेकिन सिद्धारमैया पूरा कार्यकाल चाहते हैं।
- शिवकुमार समर्थक दावा करते हैं कि उनके पास 80-90 विधायक हैं।
- हाल ही में दिल्ली में शिवकुमार की सोनिया गांधी से मुलाकात और अन्य हलचलें भी हुईं।
- सिद्धारमैया कैंप अब दलित CM की बात कर रहा है ताकि शिवकुमार को काउंटर किया जा सके






