तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने शुक्रवार शाम को चार उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा की, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और गायक-नेता बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और लोकप्रिय बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक शामिल हैं।
टीएमसी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमें आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार (पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी), मेनका गुरुस्वामी और कोयल मल्लिक की उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। हम उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हैं।”
उम्मीदवारों की सूची और उनकी पृष्ठभूमि:
- बाबुल सुप्रियो: पूर्व भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रहे बाबुल सुप्रियो 2021 में टीएमसी में शामिल हुए थे। वे फिलहाल बंगाल सरकार में आईटी मंत्री हैं और बालिगंज से विधायक हैं। उनकी शामिली से पार्टी को राजनीतिक अनुभव और प्रखर वक्ता मिलता है।
- राजीव कुमार: आईपीएस अधिकारी रहे राजीव कुमार हाल ही में जनवरी 2026 में सेवानिवृत्त हुए। वे ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं और उनके प्रशासनिक अनुभव से राज्यसभा में बंगाल के मुद्दों पर मजबूत आवाज उठाने की उम्मीद है।
- मेनका गुरुस्वामी: सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील, जो धारा 377 को चुनौती देने वाली याचिका में प्रमुख भूमिका निभा चुकी हैं। उनकी नामांकन से कानूनी विशेषज्ञता और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर फोकस दिखता है।
- कोयल मल्लिक: बंगाली सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री। उनकी लोकप्रियता से पार्टी को युवा और सांस्कृतिक वर्ग में अपील बढ़ाने की रणनीति नजर आती है।
ममता का ‘प्लान बंगाल’:
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की यह रणनीति ‘प्लान बंगाल’ के तहत देखी जा रही है, जिसमें राजनीति, प्रशासन, कानून और मनोरंजन जगत के विविध चेहरों को जोड़कर पार्टी राज्यसभा में अपनी संख्या को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में टीएमसी के पास राज्यसभा में कुछ सीटें हैं और इन चार उम्मीदवारों से वह अपनी ताकत बढ़ाकर 17 तक पहुंचाने की कोशिश में है।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में कुल 37 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को निर्धारित किया है। टीएमसी की यह सूची विविधता और संतुलन का प्रतीक मानी जा रही है, हालांकि भाजपा ने कुछ उम्मीदवारों को ‘गैर-बंगाली’ बताकर हमला बोला है।
यह फैसला बंगाल की सियासत में नई हलचल पैदा कर सकता है, क्योंकि पार्टी ने प्रशासनिक अनुभव, कानूनी विशेषज्ञता, सांस्कृतिक अपील और राजनीतिक अनुभव का अनोखा मिश्रण पेश किया है।
- बाबुल सुप्रियो
- पूर्व केंद्रीय मंत्री (भाजपा सरकार में) और गायक।
- सितंबर 2021 में भाजपा छोड़कर TMC में शामिल हुए।
- वर्तमान में पश्चिम बंगाल सरकार में आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री हैं।
- बालिगंज से विधायक।
- राजनीतिक अनुभव और प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। उनकी नामांकन से पार्टी को केंद्र में पूर्व अनुभव वाला चेहरा मिलता है।
- राजीव कुमार
- पूर्व आईपीएस अधिकारी और पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी)।
- कोलकाता पुलिस आयुक्त भी रह चुके हैं।
- जनवरी 2026 में रिटायर हुए।
- ममता बनर्जी के बहुत करीबी माने जाते हैं। शारदा चिटफंड मामले में CBI पूछताछ और ममता बनर्जी के धरने जैसी घटनाओं से चर्चित रहे।
- उनकी नामांकन से प्रशासनिक विशेषज्ञता और पार्टी की वफादारी का संदेश जाता है।
- मेनका गुरुस्वामी
- सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate)।
- धारा 377 मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रमुख वकील रही, जिससे समलैंगिकता को अपराध मुक्त किया गया।
- LGBTQ+ अधिकारों की मुखर समर्थक।
- यदि चुनी गईं, तो भारत की पहली खुलेआम LGBTQ+ सांसद बन सकती हैं।
- कानूनी विशेषज्ञता, सामाजिक न्याय और विविधता का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- कोयल मल्लिक
- बंगाली फिल्म उद्योग (टॉलीवुड) की लोकप्रिय अभिनेत्री।
- कई हिट फिल्मों में काम किया, युवाओं और सांस्कृतिक वर्ग में काफी लोकप्रिय।
- उनकी नामांकन से पार्टी को ग्लैमर, युवा अपील और बंगाली सिनेमा से जुड़े वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति दिखती है।
ममता बनर्जी का ‘प्लान बंगाल’:
यह उम्मीदवारों का चयन TMC की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें राजनीति, प्रशासन, कानून और मनोरंजन जगत के विविध क्षेत्रों से चेहरे शामिल किए गए हैं। पार्टी राज्यसभा में अपनी संख्या बढ़ाकर बंगाल के मुद्दों पर मजबूत आवाज उठाना चाहती है। यह मिश्रण ‘विविधता, प्रतिरोध और नागरिक अधिकारों’ का प्रतीक माना जा रहा है।
हालांकि, भाजपा ने कुछ उम्मीदवारों (खासकर बाबुल सुप्रियो और मेनका गुरुस्वामी) को ‘गैर-बंगाली’ बताकर हमला बोला है, लेकिन TMC इसे बंगाल की समावेशी छवि के रूप में पेश कर रही है।
यह फैसला बंगाल की सियासत में नई बहस छेड़ सकता है, खासकर 2026 विधानसभा चुनावों से पहले।






