(15 जनवरी 2026, गुरुवार – वर्तमान समय: सुबह 10:50 बजे IST)
आज पूरे भारत में मकर संक्रांति का पावन पर्व बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है! यह त्योहार सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (उत्तरायण की शुरुआत) का प्रतीक है, जो शीतकाल के अंत और नए मौसम, फसल की खुशी, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश देता है। इस साल यह पर्व 15 जनवरी को मुख्य रूप से मनाया जा रहा है, क्योंकि सूर्य 14 जनवरी रात 9:35 बजे मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं, और पुण्यकाल आज सुबह से सक्रिय है।
आज के प्रमुख अपडेट्स (लाइव ट्रेंड्स)
- देशभर में पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, गोदावरी आदि) में लाखों श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक में भीड़ उमड़ी हुई है।
- घरों में तिल-गुड़ की मिठाइयाँ, खिचड़ी, पूड़ी-चने की दाल, पोंगल बन रहे हैं। कई जगहों पर पतंगबाजी शुरू हो गई है, खासकर गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र में।
- प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और नेता शुभकामनाएँ दे रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा: “उत्तरायण की इस शुभ बेला में सूर्य देव की कृपा से सबका कल्याण हो।”
- सोशल मीडिया पर #MakarSankranti2026, #TilGudGhyaGodGodBola ट्रेंड कर रहा है। लोग तिल-गुड़ बाँटकर “तिलगुड़ घ्या, गोड गोड बोला” कह रहे हैं।
- सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता: घाटों पर पुलिस और SDRF तैनात, कोई बड़ी घटना नहीं।
- मौसम: ज्यादातर जगहों पर धूप निकली है, ठंड कम हुई है – उत्तरायण की सच्ची शुरुआत!
शुभ मुहूर्त और महत्वपूर्ण समय (पंचांग के अनुसार)
- स्नान-दान का शुभ मुहूर्त: सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक (कई जगहों पर दोपहर 1:39 बजे तक पुण्यकाल)।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक – सबसे उत्तम समय स्नान और सूर्य अर्घ्य के लिए।
- पुण्य काल: सुबह ब्रह्म मुहूर्त से 7:15-8:00 बजे तक (कुछ स्रोतों में दोपहर 12 बजे तक विस्तार) – दान और पूजन के लिए सर्वोत्तम।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 से 12:52 बजे तक – यदि सुबह न हो सके तो यह समय भी शुभ।
- महत्व: उत्तरायण शुरू होने से सभी शुभ कार्य (विवाह, गृह प्रवेश आदि) आज से शुरू होते हैं। स्नान-दान से पाप मुक्ति, स्वास्थ्य, समृद्धि मिलती है। इस बार षटतिला एकादशी का संयोग भी है, जो दान को और फलदायी बनाता है।
पूजन विधि संक्षेप में
- सुबह स्नान (नदी में या घर पर गंगाजल + तिल मिलाकर)।
- स्वच्छ वस्त्र पहनें, तांबे के लोटे में जल, रोली, अक्षत, गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- सूर्य मंत्र जपें: “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ आदित्याय नमः”।
- विष्णु-लक्ष्मी पूजा, तिल-गुड़ चढ़ावा।
- दान: तिल, गुड़, अन्न, कंबल, वस्त्र जरूरतमंदों को – कई गुना पुण्य मिलता है।
क्यों खास है यह संक्रांति?
यह फसल उत्सव है – नए अन्न की पहली कटाई की खुशी। तिल-गुड़ का मेल “मीठी-मीठी बातें” का प्रतीक है। सूर्य की कृपा से साल भर स्वास्थ्य और सफलता मिले, यही प्रार्थना।





