अमर शहीद हेमु कालानी के बलिदान दिवस पर सिंधी समाज ने दी श्रद्धांजलि

 
अमर शहीद हेमु कालानी के बलिदान दिवस पर सिंधी समाज ने दी श्रद्धांजलि


अनूपपुर/कोतमा। शेर-ए-सिंध अमर शहीद हेमु कालानी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन विरले क्रान्तिकारियों व शहीदों की श्रेणी में आते हैं, जिन्होंने अदम्य साहस से नए प्रतिरोध को ध्वस्त किया था। गुरुवार को कोतमा सिंध समाज ने सिंधी सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। अमर शहीद हेमु कालानी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की शुरूआत किशोर अवस्था से हुई जब अपने साथियों के साथ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया और लोगों से स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने का आग्रह किया। सन् 1942 में महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आन्दोलन चलाया तो हेमू इसमें कूद पड़े। 

1942 में उन्हें यह गुप्त जानकारी मिली कि अंग्रेजी सेना हथियारों से भरी रेलगाड़ी रोहड़ी शहर से होकर गुजरेगी, हेमू कालाणी अपने साथियों के साथ रेल पटरी को अस्त व्यस्त करने की योजना बनाई। और गिरफ्तार कर लिया और उनके बाकी साथी फरार हो गए। कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई उस समय के सिंध के गणमान्य लोगों ने एक पेटीशन दायर की और वायसराय से उनको फांसी की सजा ना देने की अपील की। वायसराय ने इस शर्त पर यह स्वीकार किया कि हेमू कालाणी अपने साथियों का नाम और पता बताये पर हेमू कालाणी ने यह शर्त अस्वीकार कर दी। 21 जनवरी 1943 को उन्हें फांसी की सजा दी गई। जब फांसी से पहले उनसे आखरी इच्छा पूछी गई तो उन्होंने भारतवर्ष में फिर से जन्म लेने की इच्छा जाहिर की। 21 जनवरी बलिदान दिवस पर कोतमा पूज्य सिंधी पंचायत, युवा सिंधु सेवा समीति, भारतीय सिंधु सभा तथा विश्व सिंधी सेवा संगम ने सम्मलित रूप से श्रद्धांजलि अर्पित कर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होकर समाज गौरांवित किया।

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