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February 19, 2026 7:18 pm

मैक्रों ने भारत से की बड़ी मांग: 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगाएं! फ्रांस में प्रक्रिया शुरू, G7 में प्राथमिकता

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नई दिल्ली: India AI Impact Summit 2026 के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ी अपील की है। उन्होंने कहा कि फ्रांस में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक आदि) पर बैन लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और भारत को भी इसी तरह का कदम उठाना चाहिए। मैक्रों ने मोदी को संबोधित करते हुए कहा, “मैं जानता हूं कि आप इस क्लब में शामिल होंगे। यह बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ी खबर होगी।”

समिट में मैक्रों ने बच्चों की सुरक्षा को सभ्यता का मुद्दा बताते हुए कहा, “जिस चीज की इजाजत असल दुनिया में नहीं है, वह बच्चों को ऑनलाइन भी नहीं दिखनी चाहिए। सोशल मीडिया और इंटरनेट को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाना प्लेटफॉर्म्स, सरकारों और रेगुलेटर्स की जिम्मेदारी है।” उन्होंने फ्रांस की G7 प्रेसिडेंसी में बच्चों को AI और डिजिटल एब्यूज से बचाना प्राथमिकता बताई और भारत जैसे देशों से समर्थन मांगा।

दुनिया में क्या हो रहा है?

  • ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया है (फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, यूट्यूब आदि शामिल)।
  • फ्रांस में जनवरी 2026 में नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम के लिए बैन बिल पास किया, जो अब सीनेट में है और सितंबर 2026 तक लागू हो सकता है।
  • स्पेन, डेनमार्क, जर्मनी, ग्रीस जैसे यूरोपीय देश भी इसी दिशा में कदम उठा रहे हैं।
  • भारत में भी चर्चा तेज है: IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा कि सरकार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ एज-बेस्ड रेस्ट्रिक्शंस पर बात कर रही है। गोवा, आंध्र प्रदेश जैसे राज्य ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर विचार कर रहे हैं।

मैक्रों का यह बयान ऐसे समय में आया जब समिट में बच्चों पर AI और सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव (मेंटल हेल्थ, साइबरबुलिंग, डीपफेक आदि) पर गहन चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भी MANAV विजन पेश किया, जिसमें एथिकल और इंक्लूसिव AI पर जोर दिया गया।

क्या भारत फ्रांस की तरह 15 साल से कम के लिए सोशल मीडिया बैन लगाएगा? या सिर्फ एज वेरिफिकेशन और सख्त नियमों पर फोकस करेगा? यह सवाल अब गर्म है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे युवा-प्रधान देश में यह फैसला लाखों बच्चों के भविष्य को प्रभावित करेगा।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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