डायन - प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2015 की राज्य में स्थिति और क्रियान्वयन हेतु वेबिनार आयोजित

वेबिनार में धरातल स्तर पर कार्यरत संगठन और संस्थानों ने डायन प्रथा को लेकर अपने अपने अनुभव साँझा किये। 

 

जयपुर। शुक्रवार को एक्शन एड एवं अन्य सामाजिक संगठन, संस्थाओ के सयुक्त प्रयास से डायन - प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2015 की राज्य में स्थिति और उसके  क्रियान्वयन हेतु वेबिनार आयोजित किया गया 

वेबिनार में धरातल स्तर पर कार्यरत संगठन और संस्थानों ने डायन प्रथा को लेकर अपने अपने अनुभव साँझा किये। सभी साथियो के अनुभव से यह बात निकलकर आयी कि राजस्थान का डायन - प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2015 और उनके नियम बाकी राज्यों के मुकाबले काफी अच्छे है और राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहा पर राज्य ने नियम बनाये गए है। परन्तु जब फिल्ड में उनके क्रियान्वयन में बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जैसे पोलिस प्रशासन को कानून की पूरी जानकारी नहीं है, संवेदनशीलता नहीं है, कानून लागु करने की मंशा नहीं है, कानून में जो प्रावधान है उसका कोई भी अमल किया गया नहीं है। 

कानून के तहत टास्क फ़ोर्स बनाना था वो नहीं बनाये गए, जिला सहायता समिति सक्रिय नहीं है, विशेष अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए थी वो भी नहीं हुई है। कृषि भूमि और आवास मिलना चाहिए वह नहीं मिले है, पीड़ित प्रतिकार स्कीम में जोड़ना है पर जोड़ा नहीं गया है, रोजगार से जोड़ना, पेंशन से जोड़ने की भी बात कानून में कही गई है पर उस पर कोई भी कार्यवाही नहीं हो रही है।

कानून के मुताबिक प्रत्येक जिलो में जागरूक सेंटर शुरू करना, सर्वे करवाना, मोनिटरिंग  कमिटी बनाना, जहा इस तरीके की घटना ये ज्यादा हो रही है उस एरिया को अत्याचार प्रभावित क्षेत्र घोषित करना जैसे गम्भीर बिन्दुओ पर अमल नहीं हुआ।  

कानून के प्रावधान होने के बावजूद राजस्थान में कोई भी प्रावधान को लागु किया नहीं जा रहा है और इस तरीके की घटनाओ को रोकने के लिए जो प्रयास सरकार की तरफ से होने चाहिए वह नहीं हो पा रहे है। 

सभी का कहना था की कानून को लागू करवाने के लिए सरकार की जबाबदेही सुनिश्चित करना जरुरी है साथ साथ स्कुल और कोलेज में इस मुद्दे पर बात करना और युवाओ के साथ इस मुद्दे पर बात करके जागरूकता फ़ैलाना बेहद जरुरी है। सभी साथियो ने साथ मिलकर सरकार के साथ बात करना और उसको लेकर दोनों स्तर प्रयास करने हेतु रणनिति बनायी गयी। 

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