जयपुर में परिवहन विभाग के RTO द्वितीय से जुड़े एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है. वीडियो में एक ड्राइवर ने परिवहन कर्मचारियों के खिलाफ आरोप लगाए. ड्राइवर ने बताया कि उसे बिना किसी कारण गाड़ी रोकने और 4 किलोमीटर दूर ले जाने के लिए परेशान किया गया. इस दौरान ड्राइवर ने अपनी शिकायत रिकॉर्ड करने के लिए वीडियो बनाया, जिस पर परिवहन कर्मियों ने आपत्ति जताई.
वीडियो में दिख रहा है कि जब ड्राइवर ने परिवहन निरीक्षक से उनका नाम पूछा, तो निरीक्षक ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा, “तेरे बाप का जो नाम है, वही मेरा नाम है.” हालांकि बाद में हल्की आवाज़ में खुद को बाबूलाल टांक के नाम से परिचित कराया गया. वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि यह निरीक्षक तनसुख टांक हैं.इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या सरकारी कर्मचारियों को जनता या ड्राइवरों से इस तरह की भाषा में बात करने का अधिकार है. साथ ही यह भी उठता है कि वीडियो बनाने पर ड्राइवर को धमकाया गया और उसे थप्पड़ मारने की आवाज़ भी वीडियो में सुनी जा सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी तंत्र में इस तरह की अभद्रता और धमकाना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. परिवहन विभाग में नागरिकों और ड्राइवरों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना जिम्मेदारी है. ऐसे मामले प्रशासनिक कार्रवाई और कड़े निर्देशों के माध्यम से ही सुलझाए जा सकते हैं.
इस वायरल वीडियो के बाद अब आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स में भारी नाराज़गी देखी जा रही है. लोग परिवहन विभाग से जवाबदेही और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. ऐसे मामलों को रोकने के लिए निगरानी और प्रशिक्षण को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि जनता और सरकारी कर्मचारियों के बीच विश्वास कायम रह सके. कुल मिलाकर, जयपुर में इस वायरल वीडियो ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी कर्मचारियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.






